Baisakhi 2024: बैसाखी का उत्सव आज, जानिए इतिहास, महत्व और मनाने का तरीका

Baisakhi 2024: बैसाखी कृषि से जुडा हुआ एक त्योहार है। इसे पंजाब और हरियाणा में काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. यह त्योहार सिख नववर्ष के रूप में भी मनाया जाता है. ...सिख समुदाय में बैसाखी का त्योहार खालसा पंथ के स्थापना दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. वैसाखी को विसाखी या बैसाखी के नाम से भी जाना जाता है

अपडेटेड Apr 13, 2024 पर 11:34 AM
Story continues below Advertisement
Baisakhi 2024: बैसाखी पर्व की शुरुआत 30 मार्च 1699 से मानी जाती है। इस दिन सिख समुदाय के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी।

Baisakhi 2024: बैसाखी का पर्व पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में धूमधाम से मनाया जाता है। बैसाखी का त्योहार वैशाख के महीने में मनाया जाता है। वैशाख महीने तक रबी की फसलें पक जाती हैं। उनकी अच्छी पैदावार के लिए इस दिन अनाज की पूजा कर, प्रभू को धन्यवाद किया जाता है। सिख धर्म में बैसाखी सबसे महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। बैसाखी का पावन पर्व हर साल विक्रम संवत के पहले महीने में तब मनाया जाता है, जब सूर्य मेष राशि में गोचर करते है। यही कारण है कि इस पावन पर्व को मेष संक्रांति भी कहा जाता है।

इस साल बैसाखी आज (13 अप्रैल 2024) देश भर मनाया जा रहा है। बैसाखी के दिन बंगाल में पोइला बोइसाख, बिहार में सत्तूआन, तमिलनाडु में पुथांडु, केरल में विशु और असम में बिहू मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रबी फसल को सबसे पहले अग्नि देव को अर्पित किया जाता है। फिर अगली फसल की अच्छी पैदावार की कामना की जाती है।

बैसाखी का महत्व


कहा जाता है कि इसी दिन सिख पंथ के 10वें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। तभी से बैसाखी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन से सिखों के नए साल की शुरुआत होती है। विशाखा नक्षत्र पूर्णिमा में होने के कारण इस माह को बैसाख कहते हैं। बैशाख माह के पहले दिन को बैसाखी कहा गया है।

बैसाखी का इतिहास

30 मार्च, 1699 को सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने सिख समुदाय के सदस्यों से गुरु और भगवान के लिए खुद को बलिदान करने के लिए आगे आने के लिए कहा था। आगे आने वालों को पंच प्यारे कहा जाता था। जिसका अर्थ था गुरु के पांच प्रियजन। बाद में, बैसाखी के दिन महाराजा रणजीत सिंह को सिख साम्राज्य का प्रभार सौंप दिया गया। महाराजा रणजीत सिंह ने तब एक राज्य की स्थापना की। इसी के चलते ये दिन बैसाखी के तौर पर मनाया जाने लगा।

जानिए कैसे मनाया जाता है बैसाखी का पर्व

बैसाखी के दिन सिख समुदाय के लोग गुरुद्वारा सजाते हैं। गुरु वाणी सुनते हैं और अपने-अपने घरों में विशेष पूजा करते हैं। इसके अलावा घर के बाहर लकड़ी का घेरा बना कर चलते हैं। वहां पर भांगड़ा और गिद्दा करते हैं। इसके साथ ही एक दूसरे के गले मिलकर बैसाखी की शुभकामनाएं देते हैं। इस दिन शरबत और विशेष पकवान बनाने की भी परंपरा है।

Happy Baisakhi 2024: बैसाखी के पावन पर्व पर दें लख-लख बधाई, WhatsApp और Facebook में बनाएं ये स्टेटस

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।