Chhath Puja 2023: महापर्व छठ कब हो रहा है शुरू? यहां जानिए नहाय खाय- खरना और सूर्य अर्घ्य का मुहूर्त

Chhath Puja 2023: हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, छठ का महापर्व साल में दो बार मनाया जाता है। एक कार्तिक मास में और दूसरा चैत्र मास में मनाया जाता है। चैत्र मास में करने वाले छठ व्रत को चैती छठ कहा जाता है। छठ पूजा को सूर्य षष्ठी भी कहा जाता है। यह महापर्व बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है

अपडेटेड Nov 15, 2023 पर 8:37 AM
Chhath Puja 2023: छठ का पर्व 4 दिन तक दिन धूमधाम से मनाया जाता है। ये कठिन व्रत 36 घंटे का होता है।

Chhath Puja 2023: छठ पूजा को पर्व नहीं बल्कि महापर्व कहा जाता है। यह पूरी तरह से प्रकृति को समर्पित होता है। लोग बहुत ही आस्था के साथ इस पर्व को मनाते हैं। दिवाली के बाद लोग इसकी तैयारी में जुट जाते हैं। छठ पर्व षष्ठी तिथि से दो दिन पहले यानी चतुर्थी से नहाय-खाय के साथ शुरुआती होती है। पंचमी को खरना, षष्ठी को डूबते सूर्य को अर्घ्य और सप्तमी को उगते सूर्य को जल अर्पित कर व्रत संपन्न किया जाता है। चार दिन चलने वाला इस पर्व में सूर्य और छठी मैय्या की पूजा की जाती है। इसका समापन सप्तमी तिथि को पारण करके किया जाता है।

छठ पर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। इस पर्व में खासतौर से सूर्य देव को अर्घ्य देने का सबसे ज्यादा महत्व माना गया है। छठ पर्व के समय रखा जाने वाला व्रत बेहद कठिन माना जाता है। इसकी वजह ये है कि इस व्रत को 36 घंटों तक कठिन नियमों का पालन करते हुए रखा जाता है। इस साल 2030 में छठ पर्व की पूजा 17 नवंबर 2023 से हो रही है। जिसका समापन 20 नवंबर को होगा। बिहार में यह पर्व विशेषतौर पर बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह व्रत संतान के सुखी जीवन की कामना के लिए किया जाता है।

छठ पूजा का मुहूर्त


पहला दिन नहाय-खाय तिथि

छठ पूजा का यह महापर्व चार दिन तक चलता है इसका पहला दिन नहाय-खाय होता है। इस साल नहाय-खाय 17 नवंबर को है। इस दिन सूर्योदय 06:45 बजे होगा वहीं, सूर्यास्त शाम 05:27 बजे होगा। बता दें कि छठ पूजा की नहाय खाय परंपरा में व्रती नदी में स्नान के बाद नए वस्त्र धारण कर शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं। इस दिन व्रती के भोजन ग्रहण करने के बाद ही घर के बाकी सदस्य भोजन ग्रहण करते हैं।

दूसरा दिन खरना

खरना छठ पूजा का दूसरा दिन होता है। यह 18 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन का सूर्योदय सुबह 06:46 बजे और सूर्यास्त शाम 05:26 बजे होगा। इस दिन व्रती एक समय मीठा भोजन करते हैं। इस दिन गु़ड़ से बनी चावल की खीर खाई जाती है। इस प्रसाद को मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ी से आग जलाकर बनाया जाता है। इस प्रसाद को खाने के बाद व्रत शुरू हो जाता है। इस दिन नमक नहीं खाया जाता है।

Bhaiya Dooj 2023: ये है भैया दूज पर भाईयों को तिलक करने का सही समय, जानिये विधि

संध्या अर्घ्य का समय

19 नवंबर को छठ पूजा का तीसरा दिन है। यह तीसरा दिन बेहद खास होता है। 19 नवंबर को सूर्यास्त शाम 05:26 बजे होगा। इस दिन शाम को अस्तगामी सूर्य यानी डूबते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। टोकरी में फलों, ठेकुआ, चावल के लड्‌डू आदि अर्घ्य के सूप को सजाया जाता है। नदी या तालाब में कमर तक पानी में रहकर अर्घ्य दिया जाता है।

उगते सूर्य को अर्घ्य

चौथा दिन 20 नवंबर को है। यह समापन का भी दिन है। इस दिन सूर्योदय सुबह 06:47 बजे होगा। चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद ही 36 घंटे का व्रत समाप्त होता है। छठ पूजा में मन-तन की शुद्धता बहुत जरुरी है। अर्घ्य देने के बाद व्रती प्रसाद का सेवन करके व्रत का पारण करती हैं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।