Cyber Attack: लखपति या करोड़पति बनाने वाले लिंक या वेबसाइट, कर सकते हैं कंगाल, इन तरीकों से पहचानें फेक वेबसाइट

Cyber Attack: आज के इस तकनीकी दौर में, जब इतनी बड़ी-बड़ी संस्थाओं की वेबसाइट और सर्वर सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर हम आम लोगों के डिजिटल अकाउंट या डेटा कितने सुरक्षित हैं... ये एक सोचनी वाली बात है

अपडेटेड Dec 17, 2022 पर 3:34 PM
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साइबर ठगों ने लोगों को जाल में फंसाने और उनके अकाउंट से पैसे निकालने के लिए आसान और काफी क्रिएटिव तरीकें खोज लिए हैं (Moneycontrol Hindi)

Cyber Attack: इन दिनों आपने ऐसी कई खबरें पढ़ी या सुनी होंगी कि एक लिंक (Fake Link) पर क्लिक करते ही खाली हुआ बैंक अकाउंट (Bank Account), फोन कॉल के जरिए ठग लिए गए लाखों करोड़ों रुपए... या फिर किसी संस्था की वेबसाइट हुई हैक (Hack), हैकर्स (Hackers) ने मांगी करोड़ों रुपए की फिरौती... इस तरह की घटनाओं को ही साइबर अटैक (Cyber Attack) कहा गया है और आज हैकिंग (Hacking) और साइबर क्राइम (Cyber Crime) से जुड़े मुद्दे पर ही बात करेंगे।

पिछले दिनों ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस, दिल्ली (AIIMS Delhi) की वेबसाइट हैक (Website Hack) कर ली गई। हैकर्स ने 100 में 5 सर्वर्स को हैक (Server Hack) कर लिया था। हालांकि, अब इन सर्वर्स का डेटा रिट्राइव कर लिया गया है।

ये बात हम आपको इसलिए बता रहे हैं कि क्योंकि इस पूरे मामले की जांच कर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसी आशंका है कि कुछ महीने पहले अस्पताल की वेबसाइट पर एक लिंक भेजा गया था, जिस पर क्लिक करने के बाद ही ये सर्वर हैक कर लिए गए थे।


साथ ही ये भी बताया गया कि AIIMS के सिस्टम में ऐसी कई खामियां थीं, जिनके कारण हैकर्स ने आसानी से सर्वर को हैक कर लिया।

AIIMS जैसी संस्थाओं का पूरा डिजिटल सिस्टम सरकार की निगरानी में रहता है। National Informatics Centre, NIC, जो कि एक सरकारी विभाग है। इसके तहत ही सभी सरकारी संस्थाओं की वेबसाइट ऑपरेट होती हैं।

आज के इस तकनीकी दौर में, जब इतनी बड़ी-बड़ी संस्थाओं की वेबसाइट और सर्वर सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर हम आम लोगों के डिजिटल अकाउंट या डेटा कितने सुरक्षित हैं... ये एक सोचनी वाली बात है।

इस तरह कि घटनाएं ज्यादातर इसलिए भी होती हैं, क्योंकि साइबर ठगों ने लोगों को जाल में फंसाने और उनके अकाउंट से पैसे निकालने के लिए आसान और काफी क्रिएटिव तरीकें खोज लिए हैं। साइबर ठग इसके लिए फेक वेबसाइट का भी इस्तेमाल करते हैं।

हालांकि, कुछ एक बात का ध्यान रखा जाए, तो इस तरह की साइबर ठगी का शिकार होने से बचा जा सकता है। इसलिए आज हम आपको ऐसे ही साइबर अटैक से बचने कि कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं।

अब अगर आपके पास कभी कोई ऐसा मैसेज आता है कि 'इस लिंक पर क्लिक कीजिए और जीतिए लाखों करोड़ों रुपए' या फिर किसी भी स्कीम या ऑफर के फायदा उठाने के लिए आप से किसी लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाता है, तो आपको महज इन कुछ तरीकों से ये चेक करना है कि ये वेबसाइट फेक है या नहीं और इस पर जाना आपके लिए कितना सुरक्षित है।

इन तरीकों से चेक करें URL और वेबसाइट

सबसे पहला काम आपको ये करना है कि मैसेज में जो लिंक दिया गया है या जो वेबसाइट बताई गई है, उसे किसी भी सर्च इंजन पर जाकर टाइप करें और उसका जो भी रिजल्ट सर्च इंजन की तरफ से आए, उसे रिव्यू कीजिए। इसके साथ ही, जो लिंक आपको दिया गया यानी URL उसे ध्यान से पढ़ें, काफी चीजें उसे पढ़ने से भी आपको साफ हो जाएंगी।

दिए गए लिंक में सबसे पहले ये देखें कि इसके कनेक्शन टाइप में HTTPS लिखा या HTTP लिखा है। उसके लिए पहले जान लीजिए कि HTTP और HTTPS क्या है और इन दोंनों में क्या अंतर है।

क्या है HTTP?

HTTP की फुल फॉर्म- “HyperText Transfer Protocol” है। यह एक तरह का नेटवर्क प्रोटोकॉल है, जो की वर्ल्ड वाइड वेब यानी WWW में इस्तेमाल होता है। यहां पर प्रोटोकॉल का मतलब बहुत सारे नियमों से है। इन नियमों के तहत ही वेब ब्राउसर (Web Browser) और सर्वर (Server) के बीच इंफॉर्मेशन ट्रांसफर होती है।

HTTP क्यों नहीं है सुरक्षित?

HTTP प्रोटोकॉल सिक्योर नहीं होता है। HTTP कनेक्शन के जरिए ट्रांसफर किया गया डेटा सुरक्षित नहीं होता है। इसे आसानी से हैक किया जा सकता है।

HTTP में डेटा एन्क्रिप्टेड फॉर्म में नहीं होता है। HTTP में सर्वर आइडेंटिफिकेशन की जरूरत नहीं होती। इसलिए हैकर इस डेटा को आसानी से रीड कर सकता है।

क्या है HTTPS?

HTTPS का मतलब है- 'HyperText Transfer Protocol Secured'। यह HTTP का सिक्योर्ड वर्जन है। इसमें सिक्योर्ड सॉकेट लेयर (SSL) का इस्तेमाल होता है। इस लेयर की मदद से ब्राउजर और सर्वर के बीच डेटा एन्क्रिप्टेड फॉर्म में ही ट्रांसफर होता है। HTTPS में वेबसाइट की आइडेंटिटी के लिए सिक्योरिटी सर्टिफिकेट जरूरी है।

इसके साथ ही आप वेबसाइट सर्टिफिकेशन और ट्रस्ट सील की भी जांच करें। इसके लिए SSL सर्टिफिकेशन को चेक करें और ट्रस्ट सील आमतौर पर वेबसाइट के होमपेज, लॉगिन पेज और चेकआउट पेज पर लगाए जाते हैं।

वहीं अगर आप गलती से उस लिंक पर क्लिक कर देते हैं और गलती से वेबसाइट खोल लेते हैं, तो ऐसे में आपको सबसे पहले ये देखना होगा कि वेबसाइट पर किस तरह के विज्ञापन यानी Ad चल रहे हैं।

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एक नॉर्मल और सही वेबसाइट पर बड़ी संख्या में विज्ञापन नहीं दिखते और न ही उस पर आक्रामक विज्ञापन होते हैं। अगर किसी वेबसाइट पर आपको खूब सारे आक्रामक विज्ञापन दिखते हैं, तो इसे तुरंत बंद कर दें।

साथ ही ध्यान रहे कि इनमें से किसी भी विज्ञापन पर क्लिक न करें। नहीं तो ये आपको उस वेबसाइट से एक और दूसरी फेक वेबसाइट (Fake Website) पर ले जाएगा। जिसमें काफी वायरस हो सकता है और वो आपके फोन या लैपटॉप में आ सकता है।

सही और गलत की पहचान उस वेबसाइट पर लिखे गए कंटेंट से भी होती है। अगर किसी वेबसाइट पर खराब अंग्रेजी और काफी गलत स्पेलिंग लिखी है, तो समझ जाइए कुछ गड़बड़ है। आमतौर पर खराब भाषा, व्याकरण और लिखने के तरीके से भी वेबसाइट पर सवाल उठते हैं।

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