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Dudhiya Maldah: आम के इस पेड़ की सिंचाई कभी दूध से होती थी, 33 देशों में बंपर डिमांड

Dudhiya Maldah Mango: दीघा के दूधिया मालदह आम के पेड़ आज भी सुगंध से अपने नजदीक पहुंचने का रास्ता बता देते हैं। कहा जाता है कि लखनऊ के नवाब फिदा हुसैन ने यह पौधा पाकिस्तान के इस्लामाबाद की शाह फैजल मस्जिद के इलाके से पटना के दीघा में लगाया था। उस समय इन आम के पेड़ों की सिंचाई दूध से की जाती थी

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 30, 2024 पर 2:10 PM
Dudhiya Maldah: आम के इस पेड़ की सिंचाई कभी दूध से होती थी, 33 देशों में बंपर डिमांड
दीघा का मालदह आम देश दुनिया में अपनी पहचान सालों पहले बना चुका है। इसे किसी परिचय का मोहताज होने की जरूरत नहीं है।

आम को फलों का राजा कहा जाता है। इसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। खास बात यह है कि भारत में आम की कई किस्में हैं। सभी राज्यों की अलग-अलग किस्में हैं। महाराष्ट्र का हापुस हो या फिर लखनऊ का दशहरी अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। इस बीच अगर हम पटना के दूधिया मालदाह की चर्चा की न करें तो यह अधूरा माना जाएगा। पटना के दूधिया मालदह की अपनी एक अलग पहचान है। यह अपने ज्यादा गूदा, पतला छिलका और उमदा स्वाद के लिए जाना जाता है। इसकी सुगंध से ही लोग इस ओर खिंचे चले आते हैं। इसके स्वाद की कहानी सात समंदर पार तक गूंजती है।

राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक पटना के दूधिया मालदह आम को पहुंचाया जाता है। विदेश में भी इस आम की बंपर डिमांड रहती है। पटना के बिहार विद्यापीठ स्थित आम बगान के प्रबंधक प्रमोद कुमार ने बताया कि एक समय था जब यह आम बगान पूरे दीघा क्षेत्र में था। हालांकि, कंक्रीट के जंगलों के बनने की वजह से ब इस बगीचे का आकार सिकुड़ता जा रहा है।

दूधिया मालदह आम के पेड़ों की सिंचाई दूध से होती थी

इलाके में प्रचलित कथा के मुताबिक लखनऊ के नवाब फिदा हुसैन घूमते हुए दीघा इलाके पहुंचे थे। गंगा के किनारे यह जंगह उन्हें पसंद आई। उन्होंने यहां अपना आशियाना बनवाया। क्षेत्र के बुर्जर्ग लोग बताते हैं कि नवाब साहब दूध और आम के बहुत शौकीन थे। उन्होंने बहुत सारी गायें पाल रखी थी। जब खाने से ज्यादा दूध हुआ तो उन्होंने आम के पौधों को दूध से सींचने का आदेश दिया। कई दिनों बाद जब आम की नई किस्म तैयार हुई तो इसका स्वाद लाजवाब था। दूध जैसा सफेद होने की वजह से इसका नाम दूधिया मालदह रखा गया। बताया जाता है कि पहले यह बाग एक हजार एकड़ में फैला हुआ था। बाद में इस बाग का आकार सिकुड़ता चला गया। मौजूदा समय में दूधिया मालदह का बाग राजधानी पटना में राजभवन, बिहार विद्यापीठ और संत जेवियर कॉलेज में बचे हैं।

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