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Eid-Ul-Adha 2024: देश भर में मनाई जा रही है बकरीद, मस्जिदों में उमड़ी भीड़, राष्ट्रपति ने दी बधाई

Bakrid 2024: देश में मुस्लिम भाई-बहन 'ईद उल-अधा' यानी बकरीद का त्योहार मना रहे हैं। ईद उल जुहा, बकरा ईद अथवा ईद उल बकरा के नाम से भी जाना जाता है। बकरीद के मौके पर मुस्लिम धर्म में नमाज पढ़ने के साथ साथ जानवरों की कुर्बानी भी दी जाती है। इस्लाम के अनुसार, मुस्लिम धर्म के लोग अल्लाह की रजा के लिए कुर्बानी करते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 17, 2024 पर 9:59 AM
Eid-Ul-Adha 2024: देश भर में मनाई जा रही है बकरीद, मस्जिदों में उमड़ी भीड़, राष्ट्रपति ने दी बधाई
Eid-Ul-Adha 2024: दिल्ली स्थित जामा मस्जिद में बकरा ईद के मौके पर नमाज अदा की गई। इस खास मौके पर बच्चों से लेकर बड़े तक एक दूसरे से गले मिलते नजर आए।

देशभर में आज (17 जून 2024) ईद-अल-अजहा (बकरीद) मनाई जा रही है। मुस्लिमों के सबसे बड़े त्योहारों में से एक बकरीद को लेकर देशभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। यह पर्व रमजान खत्म होने के 70 दिन बाद आता है। आज सुबह से देशभर के मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। दिल्ली में जहां जामा मस्जिद में ईद की नमाज अदा की गई तो वहीं, मुंबई में सुबह-सुबह लोगों ने ईद-उल-अज़हा के अवसर पर माहिम की मखदूम अली माहिमी मस्जिद में नमाज़ अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी।

इस खास मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु समेत तमाम नेताओं ने मुबारकबाद भी दी है। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा है, 'ईद-उल-अजहा के अवसर पर, मैं सभी देशवासियों और विदेशों में रहने वाले भारतीयों, विशेष रूप से हमारे मुस्लिम भाइयों और बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देती हूँ। यह पवित्र त्योहार त्याग और बलिदान का प्रतीक है। यह प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का संदेश देता है।

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी ने दी बधाई

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी ईद-उल-अज़हा के पर्व पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा, ईद-उल-अज़हा का त्योहार सभी को मिल-जुल कर रहने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देता है। बकरीद को लेकर उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिल रही है। सीएम योगी ने निर्देश दिए हैं कि बकरीद पर कुर्बानी के लिए स्थान स्थान पहले ही तय होना चाहिए। इसके अलावा कहीं पर भी कुर्बानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी परंपरा रही है, उसके अनुसार नमाज एक निर्धारित जगह पर ही हो और सड़कों पर नमाज नहीं होनी चाहिए।

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