Indian Railways: मोदी सरकार इन दिनों कर्मचारियों पर काफी सख्त रवैया अपना रही है। भ्रष्टाचार हो या काम करने के प्रदर्शन के मामले में सरकार कोताही नहीं बरत रही है। ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जा रहा है। अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) ने जुलाई 2021 में रेल मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। इसके बाद अधिकारियों को बार-बार चेतावनी दी थी कि अगर वे प्रदर्शन नहीं करते हैं, तो VRS लें और घर बैठें। इस बीच एक रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे ने जुलाई 2021 से हर तीन दिन में एक 'नॉन-परफॉर्मर' कर्मचारी को बाहर किया है।
सूत्रों के मुताबिक बुधवार को दो वरिष्ठ ग्रेड के अधिकारियों को लापरवाही बरतने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि उनमें से एक को हैदराबाद में CBI ने 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था। वहीं दूसरे अधिकारी को रांची में 3 लाख रुपये की रिश्वत लेते धरा गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे के 139 अधिकारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (Voluntary Retirement Scheme -VRS) लेने पर मजबूर किया गया है। वहीं 38 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जिन लोगों को VRS लेने के लिए मजबूर किया गया या बर्खास्त किया गया है। उनमें इलेक्ट्रिकल और सिग्नलिंग, मेडिकल और सिविल सेवाओं के अधिकारी, स्टोर, ट्रैफिक और यांत्रिक विभागों (mechanical departments) के कर्मचारी शामिल हैं। बता दें कि VRS लेने वाले कर्मचारी को बची हुई सर्विस के हर साल के लिए 2 महीने के बराबर की सैलरी दी जाती है। हालांकि अनिवार्य रूप से रिटायर हुए कर्मचारियों को ये लाभ नहीं मिलता है।
सरकार के पास बर्खास्त करने का अधिकार
दरअसल, रेलवे के कार्मिक और प्रशिक्षण सेवा नियमों (Railway Personnel and Training Service Rules) के नियम 56 (J) के मुताबिक, एक सरकारी कर्मचारी को कम से कम तीन महीने का नोटिस या समान अवधि के लिए पेमेंट करने के बाद रिटायर या बर्खास्त किया जा सकता है। रेलवे के मौलिक नियमों और संबंधित प्रावधानों FR 56 (J), FR 56 (L) या नियम 48 (1)(B) के तहत सरकारी कर्मचारी को रिटायर करने का पूरी तरह से अधिकार है।
लापरवाह और भ्रष्ट कर्मचारी हुए बाहर
एक अधिकारी ने बताया कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव 'काम करें या हटाए जाएं' के अपने संदेश के बारे में बहुत स्पष्ट हैं। उन्होंने आगे कहा कि लापरवाह कर्मारियों या भ्रष्ट कर्मचारियों को मोदी सरकार की ओर से भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाले सिस्टम का हिस्सा है। 139 में से कई कर्मचारी ऐसे हैं। जिन्हें प्रमोशन नहीं मिलने या छुट्टी नहीं मिलने पर नाराज होकर भी VRS ले लिया है। वहीं जबरन VRS दिए जाने पर कुछ कर्मचारियों ने विरोध भी जताया है।