Indian Railways: रेलवे का एक ऐसा कोर्स, जिसमें फेल होने के लिए झोंक देते हैं पूरी ताकत, जानिए क्यों

Indian Railways: परीक्षा कोई भी हो आमतौर पर उसे पास करने की सभी कोशिश करते हैं। लेकिन रेलवे में लोको पायलट को रिफ्रेशर कोर्स कराया जाता है। इस कोर्स परीक्षा पास करने के लिए कर्मचारी पूरी ताकत झोंक देते हैं। यह सिलसिला पिछले कई सालों से चल रहा है। इसमें फेल होने पर कर्मचारियों को घर के नजदीक पोस्टिंग बनी रहती है

अपडेटेड Feb 25, 2023 पर 3:51 PM
रेलवे के रिफ्रेशर कोर्स को पास करने पर घर से दूर काम करना पड़ता है

Indian Railways: देश में ऐकडेमिक या प्रोफेशनल कोर्स करने के बाद परीक्षाएं जरूर कराई जाती हैं। सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए भी आमतौर पर लोगों को परीक्षाओं के दौर से गुजरना पड़ता है। ऐसे में परीक्षा कोई भी हो, कैंडिडेट्स उसे पास करने के लिए एड़ी-चोटी का बल लगा देते हैं। लेकिन रेलवे में एक ऐसी परीक्षा भी होती है। जिसे फेल होने के लिए सरकारी कर्मचारी पूरी ताकत झोंक देते हैं। दरअसल उत्तर प्रदेश के झांसी में लोको पायलट्स के लिए रिफ्रेश कोर्स कराया जाता है। इस कोर्स को खत्म करने के बाद परीक्षा होती है। जिसे आमतौर पर लोको पायलट्स फेल होने में ही अपनी भलाई समझते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाइन ड्यूटी से बचने के लिए लोको पायलट यह सब खेल करते हैं। यह मामला तब खुला जब रेलवे की ओर से लोको पायलट की ड्यूटी की हिसाब किताब की पड़ताल की गई।

झांसी रेल मंडल में हजारों लोको पायलट


दरअसल, रेलवे की ओर से लोको पायल्ट्स के लिए हर 4 साल में रिफ्रेश कोर्स कराया जाता है। इस कोर्स को खत्म करने के बाद लोको पायलट्स की परीक्षा ली जाती है। इस परीक्षा में लोको पायलट्स फेल होने की पूरी कोशिश करते हैं। परीक्षा में फेल होने पर उनकी ड्यूटी रेलवे स्टेशन पर ही शंटिंग या दूसरे आसान कामों में लगा दी जाती है। ऐसे में इन लोको पायलट्स को न तो घर से दूर जाना पड़ता है और न ही ट्रेन चलाना पड़ता है। बता दें कि झांसी रेल मंडल में 2000 से ज्यादा लोको पायलट हैं। इनका मूल काम ट्रेन और मालगाड़ियों को चलाना होता है। लेकिन एक बड़ी संख्या ऐसे लोको पायलट की है जो ट्रेन चलाने से बचते हैं। उन्हें रेलवे स्टेशन पर रहकर दूसरे विभाग के काम करना पसंद है। ऐसे में इन लोको पायलट्स को न तो घर से दूर जाना पड़ता है और न ही ट्रेन चलाना पड़ता है।

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बिना ट्रेन चलाए गुजर गई आधी नौकरी 

रेलवे की ओर से की गई जांच पड़ताल में दो दर्जन लोको पायलट ऐसे सामने आए हैं। जिनकी आधी नौकरी बगैर ट्रेन दौड़ाए ही गुजर गई है। इनमें से ज्यादातर लोको पायलट ने सांठगांठ कर अपनी ड्यूटी शंटिंग में लगवा रखी है। यह खेल पिछले लंबे समय से चल रहा है। इसी का नतीजा है कि शंटिंग यार्ड में जरूरत से कई गुना ज्यादा कर्मचारियों की ड्यूटी लगी हुई है।

नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

वहीं इस मामले में झांसी रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि बेहतर रेल ऑपेरशन के लिए समय-समय पर कई तरह की परीक्षाएं और कोर्स कराए जाते हैं। लोको पायलट के लिए भी यही नियम है। अभी जांच जारी है। जो भी दोषी पाए जाएंगे। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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