Indian Railways: देश में आज भी बहुत से लोग लंबे सफर के लिए ट्रेन का सहारा लेते हैं। यह काफी आरामदायक होता है। सफर के दौरान आपने अनुभव किया होगा कि कभी-कभी ट्रेन को स्टेशन के बाहर रोक दिया जाता है। कब तक ट्रेन स्टेशन के बाहर खड़ी रहेगी। इसका कोई अनुमान नहीं रहता है। कई बार यात्री इससे इतना परेशान हो जाते हैं कि वो ड्राइवर से ही बहस करने लग जाते हैं। लेकिन, उन्हे शायद इस बात की जानकारी नहीं होती हैं कि ट्रेन को आउटर पर रोकने का जिम्मेदार ड्राइवर नहीं होता है।
हालांकि इस मामले में लोको पायलट कुछ नहीं कर सकता है। ट्रेनों को आउटर पर रोकने का फैसला उसका नहीं होता है। उसे जब तक ग्रीन सिग्नल नहीं मिलेगा वह आगे नहीं सकता है।
क्यों रुकती है आउटर पर ट्रेन?
ऐसा एक साथ 2 या उससे अधिक ट्रेनों के एक ही प्लेटफॉर्म पर पहुंचने के कारण होता है। आमतौर पर स्टेशनों पर ट्रेनों का प्लेटफॉर्म तय रहता है। ताकि लोगों को ज्यादा दिक्कत न हो। हालांकि, कभी-कभी इनमें परिस्थिति के अनुसार बदलाव भी किया जाता है। से कुछ ऐसे समझते हैं कि मान लीजिए श्रमजीवी एक्सप्रेस को लखनऊ में 3 नंबर प्लेटफॉर्म पर लाना है। उसी समय संपर्क क्रांति या कोई अन्य ट्रेन भी वहां आ जाए और उसका प्लेटफॉर्म नंबर भी 3 ही है। ऐसे में किसी एक को आउटर पर खड़ा करना होगा। हालांकि यह कोशिश की जाती है कि जो ट्रेन समय पर चल रही है। उसे वरीयता देते हुए स्टेशन पर पहले एंट्री दे दी जाए। फिर इसके बाद अन्य ट्रेनों को प्राथमिकता दी जाती है।
यह फैसला स्टेशन प्रबंधक का होता है कि किस ट्रेनों को बाहर रोक दिया जाए और किसे प्लेटफॉर्म पर लाया जाए। स्टेशन मैनेजर ये फैसला इस आधार पर लेता है कि कौन सी ट्रेन लेट चल रही है। बता दें कि भारतीय रेल दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क हैं। करीब 68,000 किलोमीटर के इस बड़े नेटवर्क में रोजाना सैंकड़ों ट्रेनें दौड़ती हैं। जिसमें कुछ ट्रेनों में डिब्बे कम होते हैं तो कुछ ट्रेनों में डिब्बे अधिक होते हैं। ऐसे में ट्रेनों का प्लेटफॉर्म भी तय कर दिया जाता है। इसकी वजह ये है कि सभी प्लेटफॉर्म की लंबाई एक समान नहीं होती है।