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इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ती अपनी पत्नी सुधा के साथ 30 सालों से नहीं गए छुट्टियों पर, कपिल शर्मा शो में हुआ खुलासा

द कपिल शर्मा शो में हाल ही में इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरपर्सन सुधा मूर्ति नजर आईं। कार्यक्रम में सुधा मूर्ति ने बताया कि इंफोसिस की स्थापना के 30 साल बाद तक, न तो उन्होंने और न ही उनके पति, इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति ने कोई छुट्टी ली है। उन्होंने कहा कि उनके पति हमेशा इतना बिजी रहते थे कि वह कभी भी छुट्टी के बारे में सोच भी नहीं सकते थे

MoneyControl Newsअपडेटेड May 22, 2023 पर 4:27 PM
इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ती अपनी पत्नी सुधा के साथ 30 सालों से नहीं गए छुट्टियों पर, कपिल शर्मा शो में हुआ खुलासा
द कपिल शर्मा शो में हाल ही में इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरपर्सन सुधा मूर्ति नजर आईं।

द कपिल शर्मा शो में हाल ही में इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरपर्सन सुधा मूर्ति नजर आईं। कार्यक्रम में सुधा मूर्ति ने बताया कि इंफोसिस की स्थापना के 30 साल बाद तक, न तो उन्होंने और न ही उनके पति, इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति ने कोई छुट्टी ली है। उन्होंने कहा कि उनके पति हमेशा इतना बिजी रहते थे कि वह कभी भी छुट्टी के बारे में सोच भी नहीं सकते थे। उनके अनुसार नारायण मूर्ति साला में 220 दिन ऑफिशियल ट्रिप पर बाहर रहते हैं। शो में सुधा मूर्ति के साथ अभिनेत्री रवीना टंडन और फिल्म निर्माता गुनीत मोंगा भी आए थे। गुनीत मोंग ने हाल ही में द एलिफेंट व्हिस्परर्स के लिए ऑस्कर जीता था।

सुधा मूर्ति ने कहा कि उनके पति नारायण मूर्ति ने साल 1981 में इंफोसिस की शुरुआत की। शुरुआत के बाद से वह कंपनी को डेवलप करने और बढ़ाने की दिशा में काम करने लगे। उन्होंने कहा कि इन्फोसिस की स्थापना के 30 साल बाद तक हम छुट्टियां नहीं ले पाए क्योंकि मेरे पति लगातार काम में बिजी थे। वह साल के 220 दिन टूर पर बिताते थे। मैंने उनसे घरेलू मदद की कभी उम्मीद नहीं की थी। मैंने अपने बच्चों को पालने की जिम्मेदारी उठाई, उन्हें नहीं पता था कि घर में क्या हुआ। हमारे बच्चों के बाहर जाने के बाद नारायण मूर्ति को अहसास हुआ कि मैंने उनकी कितनी मदद की।

सुधा मूर्ति ने अपनी उपलब्धियों का श्रेय अपने पिता आरएच कुलकर्णी को दिया, जो एक सर्जन थे। सुधा मूर्ति ने दावा किया कि उनके पिता ने उन्हें इंजीनियरिंग की डिग्री दिलाने के लिए सभी परेशानियों के साथ संघर्ष किया, वह भी उस दौर में जब यह सोचा जाता था कि केवल लड़कों को ही तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि पिछले महीने उन्होंने पुणे के टेल्को का दौरा किया, जिसे अब टाटा मोटर्स के रूप में जाना जाता है। अब 40-50 सालों के बाद वह वहां गईं तो वहां 300 लड़कियां काम कर रहीं थी। टाटा समूह की पहली महिला इंजीनियर सुधा मूर्ति ने टाटा संस्थान से बीई लिया था। उन्होंने साल 1974 में एमटेक किया अपनी क्लास में वह अकेली महिला थी। पढ़ाई के बाद वह टेल्को में शामिल हो गई।

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