Kasganj Chandan Gupta Murder Case: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में 2018 में हुए चर्चित चंदन गुप्ता हत्याकांड में कोर्ट का फैसला आ गया है। मामले में शामिल 30 आरोपियों में से 28 को दोषी पाया गया है, जबकि दो को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया है। सजा का फैसला अभी होना बाकी है। लखनऊ की एनआईए कोर्ट ने गुरुवार (2 जनवरी) को कासगंज में चंदन गुप्ता हत्याकांड में अहम फैसला सुनाया है। चंदन गुप्ता की हत्या 26 जनवरी, 2018 को तिरंगा यात्रा के दौरान कासगंज में सांप्रदायिक झड़प के दौरान हुई थी।
26 जनवरी 2018 को कासगंज में तिरंगा यात्रा निकालने के दौरान चंदन गुप्ता उर्फ अभिषेक गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इससे दो गुटों में हिंसा भड़क उठी थी। इस मामले में शुक्रवार (3 जनवरी) को सजा का ऐलान होगा।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी की अगुवाई वाली अदालत ने आरोपियों को IPC की कई धाराओं के तहत दोषी पाया। इन धाराओं में 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास) और 147 (दंगा) शामिल हैं। साथ ही राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम और सीएलए अधिनियम के प्रावधान भी शामिल हैं।
कासगंज पुलिस ने जुलाई 2018 में धारा 124 A (देशद्रोह) जोड़ते हुए चार्जशीट दाखिल किया, जिसके कारण मामला NIA कोर्ट में ट्रांसफर हो गया। शुरुआत में 30 व्यक्तियों पर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, आरोप तय होने के दौरान असीम कुरैशी और नसीरुद्दीन को बरी कर दिया गया था। यह घटना गणतंत्र दिवस की "तिरंगा यात्रा" के दौरान हुई। इसमें VHP, ABVP और हिंदू युवा वाहिनी के सदस्यों के नेतृत्व में भारतीय और भगवा झंडे के साथ 100 मोटरबाइक शामिल थीं।
प्रशासनिक प्रतिबंधों को धता बताते हुए रैली मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल बद्दूनगर इलाके में घुस गई, जिससे झड़पें शुरू हो गईं। बाद में वहां पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस अराजकता के बीच, ABVP कार्यकर्ता चंदन गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हिंसा के कारण कासगंज में अशांति फैल गई, जिसके कारण एक सप्ताह तक कर्फ्यू लगा रहा और इंटरनेट बंद कर दिया गया।
अभियोजन पक्ष के विशेष वकील के अनुसार, जुलूस पर तहसील रोड पर राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के पास हथियारबंद और हिंसा के लिए तैयार एक समूह ने घात लगाकर हमला किया था। चंदन गुप्ता उस समय बीकॉम का छात्र होने के साथ एक सामाजिक संस्था भी चलाता था। उसके पिता सुशील गुप्ता कासगंज में एक अस्पताल में बतौर कंपाउंडर काम करते थे।