केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Kerala Governor Arif Mohammed Khan) ने सोमवार को मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) पर उन्हें शारीरिक रूप से चोट पहुंचाने की साजिश रचने का सनसनीखेज आरोप लगाया। खान ने यह गंभीर आरोप ऐसे वक्त लगाया जब उनके वाहन को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की छात्र शाखा स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के कथित कार्यकर्ताओं ने उस समय टक्कर मार दी, जब वह दिल्ली जाने के लिए तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट जा रहे थे।
नाराज दिख रहे राज्यपाल अपनी कार से बाहर निकले और मीडिया से कहा कि यह मुख्यमंत्री विजयन हैं, जिन्होंने उन्हें शारीरिक रूप से चोट पहुंचाने के लिए लोगों को भेजने की साजिश रची है। खान ने यह भी कहा कि राज्य में संवैधानिक मशीनरी ध्वस्त होती दिख रही है।
SFI के विरोध प्रदर्शन पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा, "...पुलिस को इन उपद्रवियों, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने से रोका गया है...यह पांचवीं घटना थी...वे कार पर हमला करने के लिए काले झंडे के डंडे का उपयोग कर रहे थे... कार पर बहुत सारी खरोंचें हैं...ये लोग मुख्यमंत्री के निर्देश पर काम कर रहे हैं...मैं किसी को डराने की कोशिश नहीं करता और मेरे किसी भी चीज से डरने का सवाल ही नहीं उठता है...''
SFI के 20 कार्यकर्ता गिरफ्तार
केरल पुलिस ने रविवार को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को काले झंडे दिखाए जाने की दो अलग-अलग घटनाओं के सिलसिले में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के 20 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि राज्य की राजधानी में वजुथाकौड के पास राज्यपाल को उस समय काले झंडे दिखाए गए जब वह भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस ने कहा कि इस घटना के सिलसिले में SFI के 18 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब राज्यपाल कार्यक्रम से लौट रहे थे तो उन्हें फिर से काले झंडे दिखाए गए और इसके बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की छात्र शाखा एसएफआई के दो और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता वी. मुरलीधरन ने मंगलवार को कहा कि तिरुवनंतपुरम में कल की घटना जहां केरल के राज्यपाल पर हमला किया गया, वह राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति के स्तर को दर्शाता है। राजभवन से एयरपोर्ट तक उनकी यात्रा के दौरान उन पर तीन बार हमला किया गया। इन लोगों को सत्तारूढ़ मोर्चे द्वारा छूट दी गई और पुलिस ने उन लोगों के हितों के अनुरूप काम किया।