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कुमार विश्वास का घर भीषण गर्मी में रहता है हिमालय पर्वत, नहीं लगा AC, ऐसे मिला घर बनाने का आइडिया

Kumar Vishwas KV Kutir: डॉ. कुमार विश्वास की गिनती जाने-माने कवियों में की जाती है। उन्होंने अपना घर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में अपने पैतृक गांव पिलखुआ में बनाया है। इस घर का नाम 'केवी कुटीर' (KV Kutir) रखा है। यह घर भीषण गर्मी में भी कूल रहता है और एंटी बैक्टीरियल है। इस घर को 'वैदिक प्लास्टर' से बनाया गया है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 21, 2024 पर 5:07 PM
कुमार विश्वास का घर भीषण गर्मी में रहता है हिमालय पर्वत, नहीं लगा AC, ऐसे मिला घर बनाने का आइडिया
Kumar Vishwas KV Kutir: कुमार विश्वास ने दिल्ली के करीब पिलखुवा में एक खास घर बनवाया है। कविता और कथा से समय मिलने के बाद अपना वक्त यहीं बिताते हैं।

देश के मशहूर कवियों में शामिल डॉ. कुमार विश्वास अपनी कविताओं से लोगों का दिल जीतते नजर आते हैं। इन दिनों राम कथा को लेकर भी सुर्खियों में छाए हुए हैं। ऐसे में डॉ. कुमार विश्वास के बारे में जानने के लिए लोग बेहद उत्सुक रहते हैं। उनकी कुछ ऐसी कविताओं की पंक्तियां हैं, जिन्हें आज भी युवा गुनगुनाते रहते हैं। अगर वो काव्य पाठ करने गए तो उनकी पुरानी कविताओं की डिमांड बनी रहती है। इस बीच डॉ. कुमार विश्वास का घर सुर्खियां बटोर रहा है। भीषण गर्मी से बचने के लिए जहां लोग एसी की तलाश में भटकते हैं। वहां डॉ. कुमार विश्वास का घर बिना एसी के हिमालय पर्वत बना हुआ है।

दरअसल, हिंदी के मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास ने गाजियाबाद के पास अपने पैतृक गांव पिलखुआ में एक आलीशान घर बनवाया है। यह घर के दिल्ली के भी करीब है। इस घर को कुमार ने स्पेशल आडिया से बनाया है। जिसमें सीमेंट बालू का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसे देखकर हर कोई हैरान है। बता दें कि कुमार विश्वास का गाजियाबाद के वसुंधरा में भी एक घर है।

डॉ. कुमार विश्वास का घर भीषण गर्मी में हिमालय पर्वत

कुमार ने एक खास घर बनवाया है। इसका नाम 'केवी कुटीर' (KV Kutir) रखा गया है। कविता और कथा से समय मिलने के बाद अपना वक्त यहीं बिताते हैं। कुमार विश्वास का यह घर सीमेंट, रोड़ी, बजरी जैसी कंस्ट्रक्शन की पारंपरिक चीजों से नहीं बना है। इस घर को 'वैदिक प्लास्टर' से बनाया गया है। ऐसे में यह घर भीषण गर्मी में भी ठंडा रहता है। डॉ. कुमार विश्वास एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने केवी कुटीर को बनाने में रत्ती भर सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया है। इस घर को पीली मिट्टी, रेत, गोबर, तमाम तरह की दालों की चूनी, चूना, लसलसे पेड़ों जैसे- आंवला, लिसोढ़ा, गूलर, शीशम आदि के अवशेष से तैयार किया गया है। इसे वैदिक प्लास्टर नाम दिया है। प्राचीन भारत में इसी पद्धति से घर बनाए जाते थे।

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