Liver Health: शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में लिवर का बड़ा योगदान रहता है। यह भोजन में मौजूद पोषक तत्वों को छांटकर उन्हें अपने पास अलग सुरक्षित रखता है। जरूरत के अनुसार शरीर के कई हिस्सों में उनकी आपूर्ति करता है। इतना ही नहीं, यह ब्लड में मौजूद विषैले तत्वों को पहचान कर उन्हें भी शरीर में फैलने से भी रोकता है। अगर शरीर का यह महत्वपूर्ण अंग बीमार पड़ जाए, तो इसकी वजह से व्यक्ति को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं लिवर में अगर सूजन आ जाए तो इसे हेपेटाइटिस (hepatitis) कहा जाता है। इससे लिवर के काम करने पर असर पड़ता है।
हेपेटाइटिस एक वायरस होता है, जो कि ज्यादा शराब के सेवन, विषाक्त पदार्थ, दवाएं और कुछ मेडिकल कंडीशन के वजह से शरीर में पनपने लगते हैं। हेपेटाइटिस A के हल्के मामलों में इलाज की जरूरत नहीं पड़ती है। जो लोग संक्रमित होते हैं। वो ठीक हो जाते हैं। इसे बार-बार हाथ धोने और सफाई का खास तौर से ध्यान से ठीक किया जा सकता है। हेपेटाइटिस A की बीमारी से बचाव के लिए हेपेटाइटिस A की वैक्सीन लगाई जाती है।
हेपेटाइटिस ए के मरीजों में बुखार, मितली, उल्टी, भूख की कमी, अत्यंत कमजोरी, आँखों और पेशाब में पीलापन, पेट में दर्द, शरीर पर खुजली जैसे कई लक्षण नजर आते हैँ। वहीं भूख में कमी होने लगती है। हल्का बुखार आने लगता है। जोड़ों में दर्द होने की शिकायत आती है। आंखें सफेद होने लगती हैं। पूरे शरीर में तेजी से खुजली होती रहती है। कुछ मरीजों को मुँह से खून भी निकलने लगता है। स्किन पर काले धब्बे हो सकते हैं। दुर्लभ मामलों में कोई-कोई मरीज कोमा में जा सकते हैं।
ब्लड टेस्ट से इसकी पहचान की जा सकती है। इसके अलावा लिवर फंक्शन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड के जरिए भी हेपेटाइटिस के सभी प्रकारों की जांच की जाती है। टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद डॉक्टर की सलाह पर फोरन इलाज शुरू कर देना चाहिए। प्रेग्नेंसी के दौरान इसकी जांच जरूर करवानी चाहिए। कोई भी लक्षण नजर आए तो बिना देर किए डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
हेपेटाइटिस को फैलाने के लि वायरस A, B, C, D और E को जिम्मेदार माना जाता है। हेपेटाइटिस B और C के मरीजों में लिवर कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। हेपेटाइटिस A और E का संक्रमण दूषित पानी और खाने से फैलता है। हैपेटाइटिस B का वायरस इंफेक्शन, संक्रमित खून चढ़ाने या असुरक्षित यौन संबंध के कारण फैलता है। हेपेटाइटिस B, C, और D संक्रमित व्यक्ति के ब्लड या अन्य प्रकार के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है।