Sneezing: छींक आना एक सामान्य प्रक्रिया है। जब हमें जुकाम होता है या फिर धूल-मिट्टी के संपर्क में आने से भी छींक आने की समस्या बढ़ जाती है। छींक आने के समस्या को स्टर्नटेशन भी कहा जाता है। आमतौर पर धूल, पराग, जानवरों की रूसी और इसी तरह के कणों के कारण छींक आती है। यह शरीर से बिना जरूरत के कीटाणुओं को बाहर निकालने का काम करता है। लेकिन जब सर्दी-जुकाम हो जाता है तो छींक बढ़ जाती है। ऐसे में मुंह पर हाथ रखकर छींकने के बाद इस बात का विशेष ध्यान रखना जरूरी है कि हमारी वजह से किसी अन्य व्यक्ति को इंफेक्शन न फैले।
इसके लिए कुछ आसान बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ताकि अपने आसपास के लोगों को इन्फेक्शन से बचाया जा सके। बदलते मौसम में फ्लू होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती हैं। ऐसे में अगर आपको खांसी-जुकाम आदि हो तो उसे कोरोना समझने की गलती न करें। डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए। छींक आते समय इन बातों को हमेशा ध्यान रखें।
जब भी छींक आती है तो अक्सर इसका एहसास कुछ सेकंड पहले से ही होने लगता है। ऐसे में हमेशा अपने साथ रूमाल जरूर रखें। जिससे आपको जब भी छींक आए तो रूमाल हाथों के बीच रख सकें। इससे आपका संक्रमण आसपास के किसी अन्य व्यक्ति के पास पहुंचने का रिस्क काफी कम हो जाएगा। घर से बाहर निकलते समय रुमाल जरूर रखें। छींक आते समय फौरन लोगों से दूर हट जाएं। इससे वो संक्रमित होने से बच जाएंगे। अगर आप अपने आसपास किसी को खांसते या छींकते हुए पाएं तो तुरंत ही मास्क लगा लें। जिससे कि आप संक्रमण से बच जाएंगे।
अगर आपको अगर सामान्य छींक आई है या फिर कफ या कोल्ड की वजह से लगातार छींके आ रही हैं। तब ऐसी स्थिति में अपने हाथों को अन्य जगह छूने के बजाय साबुन से धोना चाहिए। 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोने से इंफेक्शन का खतरा काफी कम हो जाता है।
अगर आप लगातार छींक से परेशान हैं तो कुछ घरेलू उपाय कर सकते हैं। अगर एलर्जी की वजह से छींक आ रहा है तो रात को सोने से पहले दूध में हल्दी मिलाकर जरूर पिएं। इससे काफी आराम मिलेगा। वहीं एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद और आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर इसका सेवन करें। इससे भी काफी लाभ मिलता है।