Measles Symptoms: मुंबई में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर में खसरे के मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इससे राज्य सरकार की चिंता बढ़ गई है। मुंबई में खसरे से 10 बच्चों की मौत हो चुकी है और 208 लोगों का इलाज चल रहा है। इस बीच नासिक जिले में भी खसरा के 4 संदिग्ध मरीज मिले हैं। ठाणे, भिवंडी, मालेगांव में भी खसरा के मरीज सामने आए हैं। महाराष्ट्र में खसरा के मरीजों की संख्या बढ़ने पर राज्य की शिंदे सरकार एक्शन में आ गई है। स्वास्थ्य मंत्री तानाजी सावंत ने इस मामले में एक अहम बैठक बुलाई है।
मुंबई में सोमवार को खसरे के 24 नए मरीज मिले हैं। मुंबई के गोवंडी में सबसे ज्यादा 6 मरीज मिले हैं। उसके बाद कुर्ला में 5, अंधेरी पूर्व में 3, प्रभादेवी, गोरेगांव और कांदिवली में दो-दो मामले सामने आये हैं। जबकि भायखला, माटुंगा, भांडुप, चेंबूर में एक-एक मामला सामने आया है। इसके साथ ही खसरा मरीजों की संख्या बढ़कर 208 हो गई है।
महाराष्ट्र सरकार ने तेजी से जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री तानाजी सावंत ने मुंबई के कस्तूरबा अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने खसरे से संक्रमित बच्चों के इलाज की जानकारी हासिल की। तानाजी सावंत ने कहा कि वैक्सीनेशन के जरिए इस पर काबू पा लिया जाएगा। उन्होंने अभिभावकों से अपने बच्चों का जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराने की अपील की है। वहीं केंद्र सरकार ने खसरे की रोकथाम के लिए एक टीम का गठन किया है। इसमें राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), नई दिल्ली, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (एलएचएमसी), नई दिल्ली और क्षेत्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण कार्यालय पुणे, महाराष्ट्र के विशेषज्ञ शामिल हैं।
खसरा यानी मीजल्स बच्चों में पाए जाने वाला एक सीरियस वायरल इंफेक्शन है। इसे रूबेला (Rubeola) भी कहा जाता है। खसरा मासूम बच्चों को अपनी चपेट में लेता है। जिसमें बच्चों को बुखार, नाक बहना और चेहरे पर लाल चकत्ते निकल आते हैं। बच्चा बहुत परेशान हो जाता है। खसरा संक्रमित व्यक्ति के खांसने छींकने या उसकी त्वचा में संपर्क में आने से भी फैलता है।
खसरे के लक्षण बच्चों में 10 से 14 दिनों के बाद दिखने लगते हैं। इसमें बच्चे को बुखार आता है। बच्चा सूखी खांसी करता है। इसके साथ ही नाक से लगातार पानी बहने लगता है और गला सूखने लगता है। वहीं आंखों में सूजन आ जाती है। जिसे कंजक्टिवाइटिस कहते हैं। इसकी सबसे प्रमुख पहचान है कि बच्चे के चेहरे पर गहरा लाल रंग बन जाता है। उसमें कई सफेद छोटे-छोटे स्पॉट या चकत्ते दिखने लगते हैं। ये मुंह और गाल के पास सबसे ज्यादा होते हैं। इसे कॉपलिक स्पॉट कहते हैं।