Pratiksha Tondwalkar: सफाई कर्मचारी से SBI की असिस्टेंट जनरल मैनेजर बनीं प्रतीक्षा टोंडवलकर की कहानी आपको भावुक कर देगी
Pratiksha Tondwalkar ने अपने करियर की शुरुआत एक सफाई कर्मचारी के रूप में की थी। यहां तक कि उन्होंने स्कूल की पढ़ाई भी पूरी नहीं की। इसके बावजूद उन्होंने बेहतर जीवन की तलाश के लिए दृढ़ संकल्प लिया और उन्होंने बढ़ाई शुरू की
मनीकंट्रोल जब उनसे संपर्क किया तो उनकी इमोशनल कहानी के बारे में पता चला
20 साल की उम्र में जब प्रतीक्षा टोंडवलकर (Pratiksha Tondwalkar) ने अपने पति की मौत के बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मुंबई ब्रांच में एक छोटा सा काम शुरू किया, तो उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि वह 37 साल बाद देश के सबसे बड़े बैंक के शीर्ष अधिकारियों में से एक बन जाएगी। जी हां, प्रतीक्षा टोंडवलकर की कहानी आपको भावुक कर देगी।
टोंडवलकर ने अपने करियर की शुरुआत एक सफाई कर्मचारी के रूप में की थी। यहां तक कि उन्होंने स्कूल की पढ़ाई भी पूरी नहीं की थी। इसके बावजूद उन्होंने अपने और अपने बेटे के बेहतर जीवन की तलाश के लिए दृढ़ संकल्प लिया और उन्होंने बढ़ाई शुरू की। उन्होंने 30 साल से अधिक समय तक कड़ी मेहनत की। इसका परिणाम है कि अब उन्हें SBI में असिस्टेंट जनरल मैनेजर के पद पर प्रमोट किया गया है।
टोंडवलकर की कहानी भारत के पुरुष प्रधान बैंकिंग क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण है। अक्सर महिलाओं को अपने परिवार की देखभाल करने के साथ-साथ सामाजिक मानदंडों के खिलाफ जाकर अपना करियर बनाने के लिए उन अतिरिक्त मीलों को पार करना पड़ता है। टोंडवलकर की कहानी भी दूसरी महिलाओं से अलग नहीं है।
मंनीकंट्रोल से बताई अपनी कहानी
मनीकंट्रोल जब उनसे संपर्क किया तो उनकी इमोशनल कहानी के बारे में पता चला। टोंडवलकर का जन्म 1964 में पुणे में हुआ था। उनके माता-पिता काफी गरीब थे। परिवार ने 10वीं कक्षा की परीक्षा पूरी करने से पहले 16 साल की उम्र में ही सदाशिव कडू से उनकी शादी कर दी। कडू मुंबई में रहते थे और एसबीआई में बुक बाइंडर के रूप में काम करते थे। एक साल बाद, जब उनके पहले बेटे विनायक का जन्म हुआ, तो परिवार ने सर्वशक्तिमान को धन्यवाद देने के लिए नवजात बेटे के साथ गांव जाने का फैसला किया।
हालांकि, उन्हें थोड़ा सा भी यह अंदाजा नहीं था कि यहां से उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली है। दरअसल यात्रा के दौरान कडू का एक्सीडेंट हो गया और उनकी मौत हो गई। इसके साथ ही 20 साल की उम्र में विधवा हुई टोंडवलकर के सभी सपने चकनाचूर हो गए।
टोंडवलकर ने मनीकंट्रोल को बताया कि उस समय मुझे अपने पति का बकाया लेने SBI के ब्रांच जाना पड़ा था। मुझे पता था कि मुझे जॉब करनी है लेकिन मैं किसी नौकरी के योग्य नहीं थी। इसलिए, मैंने बैंक से नौकरी में मदद करने के लिए कहा ताकि मैं जीवित रह सकूं।
तभी तोंडवलकर ने बैंक में एक सफाई कर्मचारी के रूप में नौकरी शुरू की। वह सुबह दो घंटे तक ब्रांच में झाडू लगाने, वॉशरूम की सफाई करने और फर्नीचर की धूल झाड़ने का काम करती थी। इससे उन्हें हर महीने 60 से 65 रुपये मिलते थे।
उन्होंने कहा कि मुझे पता था कि मैं इसके लिए नहीं बनी हूं। जब मैंने लोगों को दफ्तर में काम करते देखा, तो मैं भी उनमें से एक बनने का सपना देखने लगी। तोंडवलकर ने चारों ओर पूछना शुरू कर दिया कि वह अपनी कक्षा 10वीं की परीक्षा कैसे पास कर सकती हैं। उन्होंने कुछ बैंक अधिकारियों से संपर्क किया जो उसका समर्थन करने के लिए तैयार हो गए।
बैंक अधिकारियों ने उन्हें परीक्षा फॉर्म भरने में मदद की और यहां तक कि उन्हें पढ़ने के लिए एक महीने की छुट्टी भी दे दी। उनकी सबसे बड़ी बाधा किताबें और स्टडी मैटेरियल प्राप्त करना था। सौभाग्य से उनके रिश्तेदारों, दोस्तों और सहकर्मियों ने उन्हें स्टडी मैटेरियल दी और उन्होंने कड़ी मेहनत कर 10वीं की परीक्षा में 60 प्रतिशत स्कोर लाने में कामयाब रहीं।
पीछे मुड़कर नहीं देखा
परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। टोंडवलकर को पता था कि उन्हें अपने वित्तीय तनाव से बाहर निकलने और अपने बेटे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए किसी भी हाल में बैंकिंग परीक्षा पास करनी होगी। बैंकिंग परीक्षाओं में शामिल होने के लिए कक्षा 12वीं पास करने की आवश्यकता होती है।
टोंडवलकर ने अपनी बचत की मदद से मुंबई के विक्रोली में एक नाइट कॉलेज में दाखिला लेने का फैसला किया। उन्होंने सहकर्मियों की मदद से पढ़ाई की। कक्षा 12वीं की परीक्षा भी उन्होंने पास कर ली और 1995 में एक नाइट कॉलेज का चयन करके मनोविज्ञान में ग्रेजुएट की उपाधि हालिस की। उस समय उन्हें बैंक में क्लर्क के रूप में पदोन्नत किया गया था।
टोंडवलकर ने कहा कि एक सिंगल मदर के रूप में मेरे लिए सभी बाधाओं को पार करना और अपने लिए एक स्टैंड लेना, खासकर पढ़ाई के लिए काफी मुश्किल था। उन्होंने कहा कि सामाजिक दबाव डराने वाला है। मुझे अक्सर अपने बेटे और अपने करियर के बीच चयन करना पड़ता था, लेकिन मुझे खुद से कहना पड़ता था कि मैं यह उसके (विनायक) के लिए कर रहा हूं।
फैमिली सपोर्ट
1993 में टोंडवलकर ने दूसरी बार प्रमोद तोंडवलकर से शादी करने का फैसला किया। उनके पति ने उन्हें बैंकिंग परीक्षा में बैठने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके बेटे विनायक ने भी अपनी मां को और अधिक पढ़ाई करने और कभी हार न मानने के लिए प्रोत्साहित किया। 2004 में टोंडवलकर को एक प्रशिक्षु अधिकारी के रूप में प्रमोशन हुआ था। फिर अंततः उन्हें जून में असिस्टेंट जनरल मैनेजर के रूप में प्रमोट किया गया।
टोंडवलकर के रिटायर होने में दो साल का समय है। टोंडवलकर ने 2021 में नेचुरोपैथी का कोर्स पूरा किया और रिटायरमेंट के बाद वह उस ज्ञान को लोगों की सेवा और उपयोग में लाना चाहती हैं। तोंडवलकर ने लगभग रोते हुए कहा कि जब मैं अपनी यात्रा को पीछे मुड़कर देखती हूं, तो मुझे यह सब असंभव लगता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई अवसाद में है या निराश है, तो मेरी कहानी को उन तक पहुंचना चाहिए और उन्हें प्रेरित करना चाहिए।