चैटजीपीटी (ChatGPT) की पैरेंट कंपनी ओपनएआई (OpenAI) का कहना है कि इसकी चैटजीपीटी सर्विस के लिए अहम ट्रेनिंग डेटा को हटाने का आदेश अमेरिका में इसकी कानूनी जिम्मेदारियों के खिलाफ होगा। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ओपनएआई ने भारतीय अदालत में ये बातें कही हैं। माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के निवेश वाली एआई (AI) कंपनी ओपनएआई का कहना है कि एएनआई की तरफ से दायर कॉपीराइट उल्लंघन के मामले की सुनवाई भारतीय अदालतों अधिकार क्षेत्र में यह नहीं आता कि क्योंकि ओपनएआई की देश में कोई उपस्थिति नहीं है। भारत में एआई के इस्तेमाल पर यह सबसे हाई-प्रोफाइल मुकदमा है।
ANI ने OpenAI पर क्यों किया है मुकदमा?
न्यूज एजेंसी एएनआई ने पिछले साल नवंबर 2024 में दिल्ली में ओपनएआई पर मुकदमा दायर किया। इसमें एएनआई ने आरोप लगाया है कि उसकी प्रकाशित सामग्री को अनुमति के बिना एएनआई ने चैटजीपीटी को प्रशिक्षित करने के लिए इस्तेमाल किया। नवंबर की सुनवाई के दौरान ओपनएआई ने दिल्ली की अदालत से कहा कि वह एएनआई की सामग्री का अब इस्तेमाल नहीं करेगी, लेकिन एएनआई का कहना है कि इसकी प्रकाशित सामग्री चैटजीपीटी की मेमोरी में स्टोर हो गई है जिसे हटाया जाना चाहिए।
एएनएआई की आपत्ति यह है कि बाकी न्यूज ऑर्गेनाइजेशन के साथ ओपनएआई के कॉमर्शियल पार्टरशिप के चलते कॉम्पटीशन असमान होने का डर है। न्यूज एजेंसी ने कोर्ट में कहा कि चैटजीपीटी एएनआई के कंटेंट को किसी सवाल के जवाब में हूबहू पेश भी कर रही है। इस पर ओपनएआई का कहना है कि चैटजीपीटी को गुमराह करने के लिए एएनआई अपने लेख का का एक हिस्सा प्रॉम्प्ट के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है।
ChatGPT को लेकर चल रहे मामले में क्या कहना है दोनों पक्षों का?
ओपनएआई ने उस मुकदमे का जवाब दिया है जिसमें एएनआई के डेटा को ChatGPT द्वारा पहले से स्टोर किए गए डेटा को हटाने की मांग कर रहा है, 10 जनवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय में 86 पन्नों की एक फाइलिंग के माध्यम से, जो पहले रिपोर्ट नहीं की गई थी। 10 जनवरी को ओपनएआई ने कोर्ट में कहा था कि फिलहाल यह अमेरिकी कोर्ट में चल रहे मुकदमे के चलते डेटा हटा नहीं सकती है क्योंकि जब तक सुनवाई चल रही है, वहां के कानूनों के तहत इसे डेटा को स्टोर करके रखना है। ऐसे में ओपनएआई पर डेटा को रखे रहने की कानूनी जिम्मेदारी है।
ओपनएआई का यह भी कहना है कि भारत में इसका कोई ऑफिस नहीं है और जिस सर्वर पर चैटजीपीट अपना ट्रेनिंग डेटा स्टोर करता है, वह भी भारत से बाहर स्थित है तो ऐसे में एएनआई ने जिस राहत के लिए मुकदमा किया है, वह भारतीय कोर्ट के अधिकारक्षेत्र के बाहर है। इस मामले में एएनआई का मानना है कि इस मामले की सुनवाई दिल्ली की अदालत के अधिकारक्षेत्र में है। मामले की सुनवाई अब 28 जनवरी को होगी।