Infosys ने अपने एंप्लॉयीज को मूनलाइटिंग (Moonlighting) के बारे में चेतावनी दी है। कंपनी ने एंप्लॉयीज के एक ईमेल भेजा है। इसमें कहा गया है कि मूनलाइटिंग की वजह से नौकरी तक जा सकती है। कंपनी के एचआर की तरफ से भेजे मेल में कहा गया है, "Remember-NO TWO-Timing-No Moonlighting (sic)."
इस मेल में मूनलाइटिंग की प्रैक्टिस के बारे में भी बताया गया है। इसमें कहा गया है कि मूनलाइटिंग का मतलब रेगुलर बिजनेस आवर्स के बाद दूसरा जॉब करना है। इंफोसिस ने कहा है कि कंपनी एक साथ दो नौकरियां करने के सख्त खिलाफ है। इंफोसिस का यह रुख विप्रो चेयरमैन रिशद प्रेमजी की सोच से मेल खाता है। प्रेमजी ने मूनलाइटिंग को धोखा बताया था।
मूनलाइटिंग का मतलब सुबह 9 से शाम 5 बजे की रेगुलर शिफ्ट वाली नौकरी करने के अलावा दूसरी नौकरी करने से है। मूनलाइटिंग की अलग-अलग वजहे हैं। कुछ लोग ज्यादा पैसे कमाने के लिए यह करते हैं। कुछ लोग ज्यादा अनुभव के लिए ऐसा करते हैं। कुछ लोग अपना शौक पूरा करने के लिए यह करते हैं।
आईटी कंपनियां भले ही मूनलाइटिंग के खिलाफ हों, Swiggy ने अगस्त में मूनलाइटिंग पॉलिसी पेश की थी। कंपनी ने कहा था कि उसके एंप्लॉयीज पैसे के लिए या फ्री में बाहर के प्रोजेक्ट्स कर सकते हैं। बाहर के प्रोजेक्ट की वजह से हितों के किसी तरह के टकराव यह उसके चलते स्विगी की जॉब पर असर पड़ने की स्थिति में कंपनी का एप्रूवल जरूरी होगा।
मूनलाइटिंग की भले ही पिछले कुछ महीनों से ज्यादा चर्चा हो रही है, लेकिन यह कोई नई चीज नहीं है। यह अलग-अलग रूपों में मौजूद है और आगे भी बना रहेगा। Axilor Ventures की मैनेजर निशा रामचंदानी ने लिखा है कि स्टार्टअप इसलिए बने क्योंकि उनके फाउंडर्स मूनलाइटिंग कर रहे थे। कई कंसल्टेंट्स पूरी तरह इंडिपेंडेंट बनने से पहले मूनलाइटिंग करते हैं। टीचर्स ट्यूशन सर्विस देते हैं जो मूनलाइटिंग है। कई एंप्लॉयीज के अपने साइट प्रोजेक्ट्स होते हैं।
सवाल है कि क्या मूनलाइटिंग लीगल है? All Remotely की लीगल एडवाइजर भाग्यश्री पंचोली ने कहा, "इंडिया के लेबर लॉ के हिसाब से अगर आप फुल टाइम जॉब करते हैं तो आप अपना खुदा का बिजनेस नहीं कर सकते या दूसरी जगह काम नहीं कर सकते। लेकिन, लोगों ने इससे बचने के रास्ते निकाल लिए हैं।"