भारत की आर्थिक राजधानी के तौर पर मशहूर और चार महानगरों में से एक मुंबई की एयर क्वालिटी काफी खराब दर्ज की गई। गुरुवार को लगातार दूसरे दिन मुंबई की एयर क्वालिटी राजधानी दिल्ली से भी ज्यादा खराब रही। मुंबई में खराब एयर क्वालिटी की वजह से कई सारे लोग इसे गैस चैंबर भी कह रहे हैं। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान की तरफ से मैनेज किए जाने वाले वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान और अनुसंधान प्रणाली (SAFAR) के मुताबिक गुरुवार की शाम 7 बजकर 37 मिनट पर मुंबई का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 146 था। वहीं दिल्ली में AQI 108 दर्ज किया गया था।
इस तरह से मापी जाती है एयर क्वालिटी
201 और 300 के बीच AQI को 'खराब', 301-400 को 'बहुत खराब' और 401-500 को 'गंभीर' माना जाता है, जबकि शून्य और 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक' और 101 से 200 एयर क्वालिटी को मध्यम माना जाता है। पंजाब और अन्य क्षेत्रों में पराली जलाने और तापमान में गिरावट सहित कई वजहों से हर साल अक्टूबर से दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब होने लगती है और दिवाली के आसपास खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है।
क्या कहती है CAQM की रिपोर्ट
दिल्ली-NCR में एयर क्वालिटी मैनेजमेंट का काम करने वाली एक संस्था, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने अगस्त में एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें कहा गया था कि दिल्ली में "अच्छे" से लेकर "मध्यम" तक की एयर क्वालिटी 163 दिनों तक रही थी। पिछले पांच सालों की इसी अवधि की तुलना में 2023 में जनवरी से अगस्त के दौरान एयर क्ववालिटी का दैनिक औसत 200 से कम था। पिछले महीने, दिल्ली सरकार ने शहर में सर्दियों के मौसम के दौरान वायु प्रदूषण की दिक्कत को हल करने के लिए एक प्लान को शुरू किया था।
इस वजह से नीचे जा रही है मुंबई के हवा की क्वालिटी
अधिकारियों ने मुंबई में हवा की गुणवत्ता में गिरावट के पीछे पिछले तीन से चार दिनों से मुंबई में छाई धुंध की चादर को जिम्मेदार ठहराया है। मुंबई के संरक्षक मंत्री दीपक केसरकर ने बुधवार को दावा किया कि मेट्रो जैसी विकास परियोजनाओं के चल रहे कार्यों से शहर में धूल प्रदूषण हो रहा है और यह रासायनिक प्रदूषण नहीं है। उन्होंने कहा कि शहर में मेट्रो, पुलों के साथ-साथ रियल एस्टेट परियोजनाओं का काम चल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पड़ोसी शहर ठाणे में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए फॉगिंग मशीनें लगाई गई हैं और अधिकारी जांच कर रहे हैं कि क्या प्रदूषण सोखने वाली मशीनों के अलावा ऐसी मशीनें मुंबई में भी लगाई जा सकती हैं।