Narayana Murthy advice on moonlighting : इंफोसिस के कोफाउंडर एनआर नारायण मूर्ति रिमोट वर्क यानी ऑफिस से दूर से काम करने के कभी समर्थक नहीं रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कभी मूनलाइटिंग यानी दो नौकरियां एक साथ करने की निंदा की। 23 फरवरी को पुणे में हुई एशिया इकोनॉमिक डायलॉग (Asia Economic Dialogue) में उन्होंने ईमानदार वर्क कल्चर की बात की। साथ ही जोर देकर कहा कि “आलसीपन” से निबटना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत में मेहनती और ईमानदार लोगों की संख्या खासी कम है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा, “कुल मिलाकर यह स्वभाव ज्यादा चलन में नहीं है।” टेक लीडर ने कहा कि कृपया इस जाल में न फंसें कि “मैं मूनलाइटिंग करूंगा, मैं घर से काम (work from home) करूंगा, मैं हफ्ते में तीन दिन ऑफिस आऊंगा।”
कोविड-19 के दौरान काम के तरीकों पर खासी चर्चा हुई है। संक्रमण कम होने के साथ, कई एम्प्लॉयर्स ऑफिस लौटने को अनिवार्य बना रहे थे। वहीं, अन्य काम के लिए स्टाफ को लचीलापन देना चाहते हैं। हालांकि, ज्यादातर स्थानों पर वे चाहते हैं कि कम से कम सप्ताह में दो दिन ऑफिस आने को अनिवार्य बनाना चाहिए।
मूनलाइटिंग की हुई है खासी चर्चा
इसके अलावा, मूनलाइटिंग (moonlighting) जैसे रुझान खासे चर्चा में रहे। मूनलाइटिंग का मतलब एक फुल टाइम जॉब के साथ दूसरा काम करना है। भारत में, विप्रो के रिषद प्रेमजी (Rishad Premji) इसके मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने 2002 में किए अपने एक ट्वीट के जरिये मूनलाइटिंग को “धोखाधड़ी” के समान बताया था।
Wipro ने अपनी एक प्रतिस्पर्धी कंपनी के साथ मूनलाइटिंग करने के लिए 300 कर्मचारियों को निकाल भी दिया था।
इंफोसिस (Infosys) ने भी कहा था कि वह मूनलाइटिंग स्वीकार नहीं करेगी। स्टाफ को भेजे एक ईमेल में कंपनी ने कहा था कि यह निश्चित रूप से एम्प्लॉयमेंट करार का उल्लंघन है, जिसके चलते टर्मिनेशन भी हो सकता है।