Omicron : दिल्ली में कोविड-19 (covid19) के मरीजों से लिए गए 80-90 प्रतिशत रक्त और गले के स्वैब सैम्पल्स में ओमीक्रोन के सब वेरिएंट्स (Omicron sub-variants) पाए गए हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (NCDC) और इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियारी साइंसेज (ILBS) के रिसर्चर्स के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। रिसर्चर्स ने कहा कि नमूनों में Omicron के आठ sub-lineages पाए गए हैं।
भारत में दिख रहा खासा असर
हालांकि, एक्सपर्ट्स अभी इस बात की स्टडी कर रहे हैं कि Omicron के कौन से sub-lineage और recombinant सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं।
दुनिया भर में कोविड-19 के ओमीक्रोन (Omicron) स्ट्रेन का असर खासा ज्यादा दिख रहा है और यह अभी तक सबसे तेज फैलने वाला वेरिएंट है। इस वेरिएंट के चार सब-टाइप्स BA.1, BA.2, BA.3 और BA.4 हैं। इनमें से BA.1 और BA.2 का भारत में ज्यादा असर दिख रहा है।
रिसर्चर्स ने पाया कि 80 फीसदी नमूनों में एक खास sub-lineage BA.2.12 मौजूद था, जिनका उन्होंने अध्ययन किया था।
पूरे शहर में फैल रहा ओमीक्रोन
आईएलबीएस की वीरोलॉजिस्ट (प्रो.) डॉ. एकता गुप्ता ने कहा, “अभी तक हमने देखा कि Omicron मुख्य रूप से मौजूद स्ट्रेन है जो शहर भर में फैल रहा है। इसके कई lineages और sub-lineages हैं। कभी कभार जब एक खास वायरस वातावरण में तेजी से फैलता है तो अपने आप ही उसमें बदलाव होता है। हमने शहर से जुटाए कुल सैम्पल्स में से 80-90 फीसदी में ओमीक्रोन के आठ विभिन्न प्रकार के sub-lineages पाए।”
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर की होगी जांच
उन्होंने लोगों के लिए लगातार मास्क पहनने और कोविड से बचाव के उपायों के पालन की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, “अब, देखना यह है कि इन sub-lineages का सार्वजनिक स्वास्थ्य पर क्या असर हो सकता है।”
Indian SARS-CoV-2 Genomics Consortium (INSACOG) अब यह तय करने के लिए BA.2.12 स्टडी कर रहा है कि यह कितने समय से शहर में फैल रहा है और इसकी संक्रामकता और गंभीरता कितनी है।
एनसीडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियां जुटाने में वक्त लगता है। हम पहले वायरस का पता लगाते हैं और उसे सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं से जोड़ते हैं। फिर हम केस की संख्या के आधार पर ट्रेंड देखते हैं। हां, हमने Omicron के 7-8 विभिन्न sub-lineages और recombinant का पता लगाया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भविष्य में इनके असर के लिहाज से INSACOG इनकी स्टडी कर रहा है।”