Ram Mandir Ram Lalla Surya Tilak: रामनवमी पर साइंस की मदद से भगवान सूर्य ने चूमा रामलला का माथा, जानिए गर्भगृह में कैसे पहुंची सूरज की रोशनी

Ram Mandir Ram Lalla Surya Tilak: सैकड़ों साल के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या में रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हो चुके हैं। राम मंदिर बनने के बाद रामनवमी के मौके पर रामलला का सूर्याभिषेक किया गया। यानी सूर्य की किरणें भागवान राम के मस्तक पर ले जाया गया। इसके लिए वैज्ञानिक काफी समय पहले से तैयारी में जुट गए थे

अपडेटेड Apr 17, 2024 पर 2:26 PM
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Ram Lalla Surya Tilak: भगवान राम का सूर्य अभिषेक साइंस के फॉर्मूले के तहत किया गया। वैज्ञानिकों ने इस पर रिसर्च किया था।

Ram Mandir Ram Lalla Surya Tilak: अयोध्या में राम मंदिर बनकर तैयार हो चुका है। जनवरी महीने से ही भक्तों की सैलाब उमड़ रहा है। राम मंदिर में रामलला के विराजमान होने के बाद पहली बार रामनवमी धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर रामलला का सूर्याभिषेक किया गया। रामलला के माथे पर करीब 4 मिनट तक सूर्य किरणें उन्हें चूमती रहीं। अद्भुत नजारे को देखकर हर कोई हैरान था। वैज्ञानिक तरीके से उनका ‘सूर्य तिलक’ किया गया। विज्ञान के जरिए 5.8 सेमी की प्रकाश किरण के साथ रामलला का ‘सूर्य तिलक’ किया गया। इस मौके पर करीब 10 वैज्ञानिकों की टीम मंदिर परिसर में मौजूद रही।

सूर्य की किरणें जैसे ही रामलला के माथे पर पड़ी तो उनकी मूर्ति रोशनी से नहा गई। यह सूर्य तिलक करीब 2 से 2.50 मिनट तक चला। भगवान राम का सूर्य तिलक करने के लिए आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों की टीम को शामिल किया गया था। इस भव्य, दिव्य और अलौकिक सूर्य तिलक का 100 एलईडी स्क्रीन से पूरे अयोध्या में लाइव टेलिकास्ट हुआ। इस अद्भुत नजारे का पूरा वीडियो सामने आया है।


जानिए कैसे किया गया सूर्य तिलक

दरअसल, IIT की टीम ने दर्पण और लेंस से युक्त एक विशेष उपकरण बनाया है। ताकि सूर्य की किरणों को सीधे रामलला के माथे पर पड़ें। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस सूर्य किरण को ऑप्टोमैकेनिकल सिस्टम के तहत इसे अंजाम दिया गया है। मंदिर की तीसरी मंजिल पर ऑप्टो मैकेनिकल सिस्टम स्थापित किया गया। फिर हाई क्वालिटी मिरर, एक लेंस और खास कोणों पर लगे लेंस के साथ वर्टिकल पाइपिंग लगाए गए। मंदिर के ग्राउंड फ्लोर पर दो मिरर और एक लेंस फिट किए गए। तीसरे फ्लोर पर जरूरी उपकरण लगाए गए। सूर्य की रोशनी तीसरे फ्लोर पर लगे पहले दर्पण पर गिरी। फिर तीन लेंस और दो अन्य मिरर से होते हुए सीधे ग्राउंड फ्लोर पर लगे आखिरी मिरर पर पड़ी। इससे रामलला की मूर्ति के मस्तक पर सूर्य किरणों का एक तिलक होने लगा।

वहीं पाइप के भीतरी सतह को काले पाउडर से रंगा गया। ताकि सूर्य की किरणें बिखरने न पाएं। वहीं सूर्य की गर्मी को रोकने के लिए इन्फ्रारेड फिल्टर ग्लास का भी इस्तेमाल किया गया है। सूर्य अभिषेक के रामनवमी के दिन सफल बनाने के लिए इसका ट्रायल भी किया गया था।

हर साल सूर्य की स्थिति बदलती है

CSIR-CBRI रुड़की के वैज्ञानिक डॉ एसके पाणिग्रही (Dr S K Panigrahi) ने बताया कि हर साल इस दिन आकाश पर सूर्य की स्थिति बदलती है। उन्‍होंने कहा कि विस्तृत गणना से पता चलता है कि श्री रामनवमी की तिथि हर 19 साल में दोहरायी जाती है। बता दें कि पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान श्रीराम सूर्यवंशी थे, इसलिए उन्हें सूर्य तिलक किए जाने की परंपरा है।

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