Fake News: रतन टाटा की मौत के तीन दिन के भीतर उनके Pet Dog की भी मौत! पुलिस ने बताया वायरल मेसेज का पूरा सच

कुत्तों के प्रति रतन टाटा के लगाव की बात किसी से छिपी नहीं है। और शायद यही वजह है कि रतन टाटा की मौत के बाद उनके पालतू कुत्ते गोवा को लेकर इस तरह के वॉट्सऐप मेसेज वायरल होने लगे। जानिए वॉट्सऐप मेसेज में क्या लिखा था और क्या थी उस मेसेज की सच्चाई

अपडेटेड Oct 16, 2024 पर 7:36 AM
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रतन टाटा को कुत्तों से खास लगाव था और यही वजह है कि टाटा संस के हेडक्वार्टर में आवारा कुत्तों के लिए भी एक कमरा है

रतन टाटा की मौत के बाद वॉट्सऐप पर एक मेसेज वायरल हो रहा है। इस मेसेज में यह दावा किया जा रहा है कि '9 अक्टूबर को रतन टाटा की मौत के तीन दिनों के भीतर उनके Pet Dog गोवा की भी मौत हो गई है। और इसीलिए कुत्तों को सबसे वफादार जानवर माना जाता है।' लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह मेसेज पूरी तरह गलत है। यह मेसेज इतना वायरल हो गया कि खुद मुंबई पुलिस को आकर सफाई देनी पड़ी।

मुंबई पुलिस के एक सीनियर इंसपेक्टर सुधीर कुडालकर ने कंफर्म किया है कि वॉट्सऐप पर रतन टाटा के Pet Dog को लेकर जो मेसेज वायरल हो रहा है वो गलत है। रतन टाटा का पालतू कुत्ता गोवा पूरी तरह ठीक है।

कुडालकर ने इस अफवाह का सच सबके सामने लाने के लिए एक इंस्टाग्राम पोस्ट लिखा है। उन्होंने लिखा है, "टाटाजी के करीबी दोस्त शांतनु नायडू ने यह कंफर्म किया है कि उनका पालतू कुत्ता गोवा पूरी तरह ठीक है।" कुडालकर ने शांतनु नायडू के साथ की गई अपनी बातचीत का भी स्क्रीन शॉर्ट शेयर किया है।


कुडालकर ने लोगों को सचेत करते हुए ऐसे फर्जी मेसेज से सावधान रहने को कहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी मेसेज को वॉट्सऐप पर शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई जान लें। अगर सच्चाई पता ना हो तो ऐसे मेसेज शेयर ना करें क्योंकि इससे सोशल मीडिया पर गलतफहमी फैलती है।

मुंबई पुलिस के कुडालकर जानवरों के लिए अपने प्यार को लेकर भी जाने जाते हैं। इसके लिए उन्हें PETA जैसी संस्था ने भी सम्मानित किया है।

रतन टाटा को जानवरों से था खास लगाव

रतन टाटा का निधन 9 अक्टूबर को हुआ था। वह 87 साल के थे। कुत्तों से उन्हें काफी लगाव था। ऐसी तमाम कहानियां हैं जिससे उनके इस लगाव के बारे में पता चलता है। रतन टाटा के पास पहले एक पालतू कुत्ता टीटो हुआ करता था। एकबार जब उसका पैर टूट गया तो वह अपने प्राइवेट प्लेन से अमेरिका के उस अस्पताल में गए जो हड्डी ट्रांसप्लांट करने में माहिर था। लेकिन सर्जरी फेल होने के बाद टीटो नहीं रहा और तब रतन टाटा बहुत दुखी हुए थे।

ये बात किसी से नहीं छिपी है कि टाटा संस के हेडक्वार्टर में आवारा कुत्तों को आने की खुली छूट है। टाटा संस के दरवाजे के साथ बनी सीढ़ियों के बगल में एक बड़ा कमरा आवारा कुत्तों के लिए बनाया है। ताज होटल का बचा खाना अपनी गाड़ी में भरकर वह रात को कोलाबा की गलियों में कुत्तों को खिलाया करते थे। उन्होंने जानवरों के लिए अस्पताल भी बनाया है।

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