भारत के दिग्गज उद्योगपति और टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन रतन टाटा (Ratan Tata) को ऑस्ट्रेलिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया है। भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में रतन टाटा के प्रयासों के लिए 'ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया (Order of Australia)' से सम्मानित किया गया है। भारत में ऑस्ट्रेलिया के राजदूत बैरी ओ’फेरेल (Barry O’Farrell) ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। उन्होंने अपने ट्विटर पर लिखा कि रतन टाटा को 'ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया' से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा भारत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया में भी रतन टाटा का योगदान रहा है।
ऑस्ट्रेलियाई राजनयिक ने शनिवार को समारोह की तस्वीरें शेयर करते हुए कहा कि रतन टाटा के योगदान ने ऑस्ट्रेलिया में भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। अपने ट्वीट में रतन टाटा के साथ कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। साथ ही कैप्शन में लिखा, 'रतन टाटा न केवल भारत में बिजनेस, इंडस्ट्री के दिग्गज हैं, बल्कि उनके योगदान ने ऑस्ट्रेलिया में भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है।' उन्होंने आगे लिखा, 'रतन टाटा को ऑस्ट्रेलिया-भारत रिलेशनशिप के प्रति उनके लॉन्ग स्टैंडिंग कमिटमेंट के लिए ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया पुरस्कार से सम्मानित करते हुए बहुत खुशी हो रही है।'
85 वर्षीय दिग्गज भारतीय कारोबारी को ऑस्ट्रेलिया-इंडिया बायलेट्रल रिलेशनशिप, ट्रेड, इन्वेस्टमेंट और परोपकारिता में उनके योगदान के लिए ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया के जनरल डिवीजन में एक मानद अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। इसकी जानकारी टाटा पावर सदर्न ओडिशा डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव राहुल रंजन ने दी है। उन्होंने अपने एक लिंक्डइन पोस्ट पर फेसिलेशन सेरेमनी की तस्वीरें भी शेयर की हैं।
इससे पहले पिछले साल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) से जुड़े सेवा भारती ने रतन टाटा को परमार्थ के क्षेत्र में उनके काम के लिए ‘सेवा रत्न’ से सम्मानित किया था। बता दें कि रतन टाटा की कंपनी भारत सहित दुनियाभर में परोपकार के लिए जानी जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो रतन टाटा अपने कमाई का 60 से 70 फीसदी हिस्सा परोपकार के लिए दान कर देते हैं। टाटा ट्रस्ट, टाटा संस की होल्डिंग के तहत टाटा फर्मों द्वारा किए गए कमाई का 66 प्रतिशत परोपकार कार्यो के लिए योगदान देता है।
अपने विनम्र स्वभाव के लिए जाने जाने वाले रतन टाटा ने मार्च 1991 में टाटा ग्रुप के चेयरमैन के रूप में कार्यभार संभाला और 2012 में अपने पद से हट गए। उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने कई बड़े मुकाम को हासिल किया है। 2008 में उन्हें भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।
Ratan Tata is a titan of biz, industry & philanthropy not just in