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Sharon Raj murder case: बॉयफ्रेंड की हत्या करने वाली महिला को मौत की सजा, टॉनिक में जहर मिलाकर ली थी प्रेमी की जान, जानें पूरा मामला

Sharon Raj murder case: 24 साल की दोषी महिला का नाम ग्रीष्मा है। उसने अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों, पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास नहीं होने और अपने माता-पिता की इकलौती बेटी होने का हवाला देते हुए सजा में नरमी का अनुरोध किया था। हालांकि कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया

Akhileshअपडेटेड Jan 20, 2025 पर 2:23 PM
Sharon Raj murder case: बॉयफ्रेंड की हत्या करने वाली महिला को मौत की सजा, टॉनिक में जहर मिलाकर ली थी प्रेमी की जान, जानें पूरा मामला
Sharon Raj murder case: ग्रीष्मा को शेरोन राज की हत्या के लिए सजा सुनाई गई है

Sharon Raj murder case: केरल की एक अदालत ने एक महिला को 2022 में उसके प्रेमी की हत्या करने के जुर्म में मौत की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि महिला ने अपने पुरुष मित्र से प्रेम का इजहार करके उसे मौत के घाट उतार दिया। नेय्याट्टिनकरा अतिरिक्त जिला सत्र न्यायालय ने सोमवार (20 जनवरी) मामले में तीसरे आरोपी एवं महिला के रिश्तेदार निर्मलकुमारन नायर को भी तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। 24 साल की दोषी महिला का नाम ग्रीष्मा है। उसने अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों, पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास नहीं होने और अपने माता-पिता की इकलौती बेटी होने का हवाला देते हुए सजा में नरमी का अनुरोध किया था।

अदालत ने अपने 586 पेज के फैसले में कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषी की उम्र पर विचार करने की कोई आवश्यकता नहीं है। ग्रीष्मा को शेरोन राज की हत्या के लिए सजा सुनाई गई है जो तिरुवनंतपुरम जिले के परसाला के मूल निवासी थे। ग्रीष्मा को तीन साल पहले जहर मिला आयुर्वेदिक टॉनिक देकर शेरोन राज की हत्या करने के मामले में मौत की सजा सुनाई। उस पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

शुक्रवार (17 जनवरी) को ग्रीष्मा को हत्या का दोषी पाया गया था। लेकिन अदालत ने आज (20 जनवरी) तक सजा सुरक्षित रख ली थी। उसके चाचा निर्मल कुमार को हत्या में सहयोगी होने और सबूत नष्ट करने के लिए तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। हालांकि, उसकी मां सिंधु को अदालत ने बरी कर दिया है। नेय्याट्टिनकारा अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने यह कहते हुए मृत्युदंड सुनाया कि यह दुर्लभतम मामला है। इसलिए उसकी उम्र को ध्यान में नहीं रखा जा सकता।

बचाव पक्ष ने पहले अपनी दलीलों में कहा कि वह एक युवा महिला थी जिसका शैक्षणिक रिकॉर्ड बहुत अच्छा था। उसे सुधार का मौका मिलना चाहिए। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि उसने पहले से ही सुधार के संकेत दिखाए हैं। इसलिए उसे अपना जीवन फिर से बनाने का अवसर दिया जाना चाहिए।

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