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फल-सब्जी खरीदते समय रहें अलर्ट, तराजू की कड़ी चढ़ाकर होती है ठगी, दुकानदार ने किया बड़ा खुलासा

अगर आप फल-सब्जी खरीदने जा रहे हैं तो हमेशा अलर्ट रहे। दुकानदार तौल में बड़ा घपला कर सकते हैं। आपकी नजर तराजू पर रहेगी और दुकानदार कब कांटा मार दे। पता नहीं नहीं चलेगा। दुकानदारों की ओर से की जा रही ठगी का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 13, 2024 पर 4:14 PM
फल-सब्जी खरीदते समय रहें अलर्ट, तराजू की कड़ी चढ़ाकर होती है ठगी, दुकानदार ने किया बड़ा खुलासा
बाजार में फल-सब्जी खरीदते समय कुछ दुकानदार कांटा चढ़ा लेते हैं। जिससे वजन कम हो जाता है।

बाजार में कुछ भी सामान खरीदने से पहले चौकन्ना रहने की जरूरत है। अगर आप किसी चीज को तौल में ले रहे हैं तो हमेशा सर्तक रहें। दुकानदारों की ओर से ग्राहकों के साथ कब ठगी हो जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है। बहुत से दुकानदार तौल में कांटा मार देते हैं। जिससे एक किलो का सामान आपको 800 ग्राम ही मिलेगा। करीब 200-300 ग्राम तक दुकानदार कांटा मार देते हैं। फल-सब्जी तौलने वाले दुकानदार ग्राहकों के साथ कैसे ठगी करते हैं, इस बारे में सोशल मीडिया में एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। जिसमें एक दुकानदार ने बड़ा खुलासा किया है।

दरअसल, दुकानदारों की तौल की जांच पड़ताल करने की जिम्मेदारी बाट-तौल माप अधिकारी की होती है। यह राज्य सरकार के तहत आता है। हर जिले में माप-तौल के दफ्तर होते हैं। इसके साथ ही तहसील स्तर पर भी बाट तौल माप अधिकारी होता है। जो तराजू, बाट की जांच पड़ताल करते हैं। उनकी मुहर लगती है। इसके बाद तराजू और बाट का इस्तेमाल किया जाता है।

दुकानदार ने बताया कैसे ग्राहकों के साथ होती है ठगी?

सोशल मीडिया पर एक शख्स ने वीडियो शेयर किया है। जिसमें बताया गया है कि तराजू के साथ कैसे हेर-फेर किया जाता है। इसमें दुकानदार ने बताया कि किस तरह से वो लोगों को एक आसान तरीके से ठगी का शिकार बनाते हैं। सामान का वजन करने के दौरान वो तराजू के एक हिस्से को इस तरह से घूमा देते हैं। आम बोलचाल में इसे कांटा मारना कहते हैं। यानी तराजू की कड़ी चढ़ा दी जाती है। इससे 1 किलो का सामान करीब 200 ग्राम कम हो जाता है। कभी-कभी यह 300 ग्राम तक कम हो जाता है। वहीं ग्राहक भी कांटा मारने की इस कला से परिचित नहीं होते हैं। सामान खरीदते समय ग्राहकों की नजर सुई पर रहती है। हर किसी की नजर तराजू की कड़ी पर नहीं होती है। यहीं से ग्राहक के साथ खेल कर दिया जाता है।

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