Toll Tax: एक से दूसरी जगह जाने के लिए हर वाहन को टोल टैक्स चुकाना पड़ता है। टोल आपकी दूरी और डेस्टिनेशन पर निर्भर करता है। कहीं के लिए टैक्स 100 रुपए लगता है तो कहीं के लिए 200 रुपए भी देना पड़ जाता है। टोल टैक्स एक खास तरह का टैक्स होता है। इसके तहत सरकार वाहन चालकों से सड़क बनाने में आई लगात की भरपाई करती है। टोल टैक्स चार पहिया वाहन जैसे कार, बस, ट्रक या उससे बड़े वाहनों पर लिया जाता है। सरकार टोल टैक्स के पैसों से सड़कों का निर्माण और उनका रखरखाव करती है। किन्हीं दो टोल प्लाजा के बीच की दूरी 60 किमी होती है।
आज जब तकनीक के विकास से कई काम काफी आसानी से हो रहे हैं। ऐसे में सरकार फास्टैग के जरिए टोल टैक्स ले रही है। अब सरकार फास्टैग की जगह सैटेलाइट के जरिए टोल टैक्स वसूलने की तैयारी में हैं। सैटेलाइट बेस्ड टोल सिस्टम लागू होने के बाद टोल प्लाजा पर कार को रुकना नहीं पड़ेगा। खुद ही जीपीएस से आपका नंबर ट्रैक होगा। इसके बाद अकाउंट से पैसे कट जाएंगे।
हम जब भी कोई वाहन सड़क पर चलाते हैं तो, उसको सड़क पर चलाने के लिए आपको उसके बदले एक राशि का भुगतान करना पड़ता है। जिसे 'टोल टैक्स' (Toll Tax) कहते है। टोल टैक्स को हिंदी में 'राहदारी' कहा जाता है। इसे indirect tax की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, टोल टैक्स सिर्फ नेशनल हाईवे, सुरंगें, एक्सप्रेसवे और अन्य ख़ास सड़कों या हाइवे (एक्सप्रेसवे या राजमार्ग) पर ही लिया जाता है। ये टैक्स नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) वसूलता है। बता दें कि NHAI सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय के तहत काम करता है। टोल टैक्स दो तरह का होता है। पहला स्टेट हाइवे टोल टैक्स (STX) और दूसरा नेशनल हाइवे टोल टैक्स (NTX) होता है।
स्टेट हाइवे टोल टैक्स (STX) उन हाइवे वाली सड़कों पर वसूला जाता है। जो एक ही राज्य में एक स्टेट को दूसरे स्टेट को जोड़ती हैं। आम भाषा में समझे तो, एक ही राज्य के भीतर एक शहर से दूसरे शहर जाने पर जो टोल प्लाजा में टैक्स वसूला जाता है। उसे स्टेट हाइवे टोल टैक्स (STX) कहते हैं।
नेशनल हाइवे टोल टैक्स (NTX) उन हाइवे वाली सड़कों पर वसूला जाता है। जिसमें एक राज्य से दूसरे राज्य की ओर जाते हैं। इसे आसान भाषा में कहें तो एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाले टैक्स को नेशनल हाइवे टोल टैक्स (NTX) कहते हैं।