Russia-Ukraine Crisis: यूक्रेन रूस के साथ युद्ध से बचने के लिए नाटो में शामिल होने के लिए अपनी कोशिश छोड़ सकता है। बीबीसी ने ब्रिटेन में यूक्रेन के राजदूत के हवाले से यह जानकारी दी। राजदूत वादिम प्रिस्टाइको ने बीबीसी को बताया कि यूक्रेन अटलांटिक सैन्य गठबंधन में शामिल होने के अपने लक्ष्य पर "लचीला" होने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यह कदम रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए एक ट्रिगर होगा।
यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने रविवार देर रात फेसबुक पर लिखा कि रूस ने इस बारे में स्पष्टीकरण के लिए कीव के औपचारिक अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया कि मॉस्को ने यूक्रेन के आसपास 100,000 से अधिक सैनिकों और उन्नत हथियारों को क्यों तैनात किया था। उन्होंने लिखा, "यूक्रेन अगले 48 घंटों में रूस और सभी सदस्य देशों के साथ एक बैठक बुला रहा है, ताकि हमारी सीमा पर रूसी बलों के सुदृढीकरण और आवाजाही पर चर्चा की जा सके।"
रूस ने शुरू किया युद्धाभ्यास
रूस ने पिछले हफ्ते बेलारूस और काला सागर में युद्धाभ्यास शुरू कर दिया। उसने पूरे बेलारूस और काला सागर में अपने टैंकों को घुमाया। इसके साथ ही यूक्रेन पर रूसी हमले की आशंका और गहरा गई है। बेलारूस में रूसी युद्धाभ्यास 20 फरवरी तक चलेगा। माना जा रहा है कि यह नाटो और पश्चिमी देशों के लिए रूस की नई चेतावनी है। इस बीच, यूक्रेन भी इस क्षेत्र में रूस के युद्धाभ्यास के जवाब में सैन्य अभ्यास करने का ऐलान किया है।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूक्रेन में रह रहे अपने सभी नागरिकों से रूस की ओर से सैन्य कार्रवाई के बढ़ते खतरों के मद्देनजर तुरंत देश छोड़ने की अपील की है। बाइडेन ने कहा कि अगर रूस यूक्रेन पर हमला करता है तो वह अमेरिकियों को बचाने के लिए सेना नहीं भेजेंगे। यूएस राष्ट्रपति ने चेताया है कि इस क्षेत्र में हालात तेजी से बदल सकते हैं। बाइडेन ने NBC न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिकी नागरिकों को अब यूक्रेन छोड़ देना चाहिए।
रूस ने यूक्रेन की सीमा पर करीब एक लाख सैनिकों की तैनाती कर दी है, हालांकि वह यूक्रेन पर हमले की योजना से इनकार करता रहा है। नाटो ने कहा है कि रूस की मिसाइलें, भारी तोपखाना और मशीन गनों के जवानों की तैनाती यूरोप के लिए खतरनाक क्षण है। बता दें कि सोवियत संघ के पतन के 30 साल बाद यह हालात बने हैं। पश्चिमी नेता इस प्रयास में जुटे हैं कि रूस के साथ बातचीत के रास्ते बंद न हों। वे चाहते हैं कि नाटो के विस्तार को लेकर रूस की चिंताओं एवं शिकायतों को सुना जाए। यूक्रेन के साथ बढ़ते तनाव के बीच चीन ने हाल ही में रूस से सहमति जताते हुए नाटो के विस्तार का विरोध किया था।
नाटो यानी उत्तर अटलांटिक संधि संगठन उत्तरी अमेरिका और यूरोप का एक साझा राजनैतिक और सैन्य संगठन है। यह साल 1949 में बना था। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद बने इस संगठन का उस वक्त पहला और सबसे बड़ा मकसद था सोवियत संघ के बढ़ते दायरे को सीमित करना। इसके अलावा अमेरिका ने इसे यूरोप में राष्ट्रवादी विचारों को पनपने से रोकने के लिए भी इस्तेमाल किया, ताकि यूरोपीय महाद्वीप में राजनीतिक एकता कायम हो सके।
1949 में जब नाटो बना तो इसके 12 संस्थापक सदस्य थे- अमेरिका, ब्रिटेन, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्जमबुर्ग, नीदरलैंड्स, नॉर्वे और पुर्तगाल। मूल रूप से ये संगठन साझा सुरक्षा की नीति पर काम करता है। इसका मकसद है कि अगर कोई बाहरी देश किसी नाटो सदस्य देश पर हमला करे तो बाकी सदस्य देश हमला झेल रहे देश की सैन्य और राजनीतिक तरीके से सुरक्षा करेंगे।
यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं है, लेकिन 2008 से एक वादा किया है कि उसे अंततः शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। यह एक एक ऐसा कदम है अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन को रूस की सीमा पर लाएगा। पुतिन का कहना है कि यूक्रेन के गठबंधन के साथ बढ़ते संबंध इसे रूस पर लक्षित नाटो मिसाइलों के लिए लॉन्चपैड बना सकते हैं। उनका कहना है कि रूस को इसे रोकने के लिए 'रेड लाइन' की जरूरत है।