₹5,000 में कट्टा और 50,000 में रिवॉल्वर... यूपी में Instagram-Facebook पर धड़ल्ले से बिक रहे थे हथियार, 7 गिरफ्तार

UP News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया साइटों पर अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त करने के आरोप में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों को उस समय पकड़ा गया जब पुलिस ने एक वाहन चेकिंग अभियान चलाया, जिसके बाद उन्हें एक गुप्त सूचना मिली कि एक अवैध पिस्तौल की डिलीवरी की जानी है

अपडेटेड Oct 31, 2024 पर 4:26 PM
UP News: यूपी पुलिस ने दो खरीदारों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है

UP News: उत्तर प्रदेश पुलिस ने Instagram, Facebook और WhatsApp के जरिए ऑनलाइन हथियार बेचने वाले एक गैंग का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में दो खरीदारों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गैंग को मंगलवार (29 अक्टूबर) को मुजफ्फरनगर में रिवॉल्वर की डिलीवरी करते समय गिरफ्तार किया गया। यूपी पुलिस ने बताया कि आरोपी आजम रिजवी, विवेक नागर, मनीष कुमार, प्रदीप कुमार, ऋषभ प्रजापति, विशाल और प्रतीक त्यागी को उस समय अरेस्ट किया गया जब पुलिस ने एक वाहन चेकिंग अभियान चलाया। पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी कि एक अवैध पिस्तौल की डिलीवरी की जानी है। जब आरोपी खरीददारों तक माल पहुंचा रहे थे, तभी पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वे 4,000-5,000 रुपये में कट्टा (देशी पिस्तौल) बेचते थे, जबकि इंपॉर्टेंट रिवॉल्वर 40,000-50,000 रुपये में उपलब्ध था। उन्होंने बताया कि पेमेंट के बाद हथियार खरीददारों के स्थानों पर पहुंचा दिए जाते थे। आरोपियों के कब्जे से पांच देशी बंदूकें, तीन इंपॉर्टेंट पिस्तौल, करीब दो दर्जन गोलियां, एक बाइक और एक कार जब्त की गई।

टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के मुताबिक, मुजफ्फरनगर SP (शहर) सत्यनारायण प्रजापत ने कहा, "यह गिरफ्तारी राज्य में अवैध डिजिटल हथियार नेटवर्क पर हमारी कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण कदम है। शुरुआती जांच से पता चलता है कि उनके पास आसपास के जिलों के अन्य गिरोहों के साथ संबंध हैं। वे खरीदारों को आकर्षित करने के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे। ऑनलाइन सौदा करने के बाद, वे 'पैकेज' देने से पहले बैंक अकाउंट्स के माध्यम से भुगतान प्राप्त करते थे।"


प्रजापत ने आगे कहा, "डिलीवरी की सूचना मिलने के बाद सर्कल ऑफिसर (शहर) वियोम बिंदल ने एक टीम बनाई और मंगलवार को जाल बिछाया। जब संदिग्ध दो खरीदारों को खेप देने पहुंचे, तो सभी को पकड़ लिया गया।" खालापार पुलिस स्टेशन में सात लोगों आजम रिजवी, विवेक नागर (दोनों मेरठ), प्रतीक त्यागी, मनीष कुमार, ऋषभ प्रजापति, विशाल और प्रदीप कुमार (सभी मुजफ्फरनगर) के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

ये भी पढ़ें- Maharashtra Richest Candidate: कौन हैं BJP उम्मीदवार पराग शाह, जो ₹3,383.06 करोड़ के हैं मालिक, 5 साल में 575% संपत्ति बढ़ी

विशाल और प्रतीक रिवॉल्वर लेने आए थे। उन सभी को जेल भेज दिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुलिस को बताया, "ऑनलाइन पिस्तौल या गोलियों का सौदा करना काफी सुरक्षित था। सौदा पक्का करने के लिए ज्यादा यात्रा करने की जरूरत नहीं थी।" अपने काम करने के तरीके का खुलासा करते हुए आरोपियों ने बताया कि वे सबसे पहले जरूरी हथियार की तस्वीरें और उसकी विशेषताएं भेजते थे। सौदा पक्का होने के बाद, वे अपने बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लेते थे और फिर "पैकेज" डिलीवर कर देते थे। सूत्रों ने बताया कि गैंग के सदस्य लंबे समय से काम कर रहे थे और पुलिस के रडार पर थे।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।