Zakir Naik plea in Supreme Court: केंद्र सरकार ने कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक और भारतीय भगोड़े जाकिर नाइक की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर बुधवार (16 अक्टूबर) को सवाल उठाया। केंद्र ने कहा कि एक ऐसा व्यक्ति, जिसे भगोड़ा घोषित किया गया है, संविधान के आर्टिकल-32 के तहत याचिका कैसे दायर कर सकता है। इस याचिका में नाइक ने 2012 में गणपति उत्सव के दौरान दिए उसके कथित आपत्तिजनक बयानों को लेकर विभिन्न राज्यों में दर्ज FIR को एक साथ जोड़ने का अनुरोध किया गया है।
जस्टिस अभय एस ओका, जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्ला और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष पेश सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने पूछा कि एक ऐसा व्यक्ति, जिसे भगोड़ा घोषित किया गया है, संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत याचिका कैसे दायर कर सकता है। पीटीआई के मुताबिक मेहता ने कहा, "मुझे उसके वकील ने बताया कि वे मामला वापस ले रहे हैं। हमारा जवाब तैयार है।"
नाइक की तरफ से पेश वकील ने कहा कि उसे मामला वापस लेने के संबंध में कोई निर्देश नहीं मिला है। याचिका में विभिन्न राज्यों में दर्ज लगभग 43 FIR को एक साथ जोड़ने का अनुरोध किया गया है। वकील ने कहा कि उसके मुवक्किल के खिलाफ छह FIR विचाराधीन हैं। वह इन्हें रद्द करने के लिए हाई कोर्ट का रुख करेगा।
शीर्ष अदालत ने नाइक के वकील को हलफनामा दायर कर यह बताने का निर्देश दिया कि वह मामला जारी रखेगा या इसे वापस लेगा। इसके साथ ही अदालत ने मेहता से मामले में जवाब दाखिल करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी। नाइक फिलहाल विदेश में है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कथित आतंकवादी गतिविधियों में उसकी संलिप्तता की भी जांच कर रहा है।
जाकिर नाइक कई वर्षों से प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दायरे में भी है। उस पर विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए आईपीसी की धारा 153A और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 10, 13 और 18 के तहत आरोप हैं। मुंबई की एक विशेष NIA अदालत ने 2017 में नाइक के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।
नाइक अदालत के सामने पेश होने में विफल रहा है। कथित तौर पर वह मलेशिया में रह रहा है। 2022 में केंद्र सरकार ने नाइक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) को UAPA के तहत एक गैरकानूनी संगठन घोषित किया था।