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ULFA, केंद्र और असम सरकार के बीच 'ऐतिहासिक' शांति समझौता, गृह मंत्री शाह ने पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बताया 'महत्वपूर्ण'

ULFA के वार्ता समर्थक गुट ने हिंसा छोड़ने, संगठन को भंग करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने पर सहमति व्यक्त करते हुए केंद्र और असम सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। उल्फा का गठन 1979 में 'संप्रभु असम' की मांग को लेकर किया गया था। तब से, यह विध्वंसक गतिविधियों में शामिल रहा है जिसके कारण केंद्र ने 1990 में इसे प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 29, 2023 पर 7:29 PM
ULFA, केंद्र और असम सरकार के बीच 'ऐतिहासिक' शांति समझौता, गृह मंत्री शाह ने पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बताया 'महत्वपूर्ण'
Ulfa Peace Deal: समझौते से असम और पूर्वोत्तर राज्यों में दशकों पुराने उग्रवाद के खत्म होने की उम्मीद है

यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) के वार्ता समर्थक गुट ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में शुक्रवार को केंद्र और असम सरकार के साथ ऐतिहासिक त्रिपक्षीय 'शांति समझौता' ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस शांति समझौते से असम और पूर्वोत्तर राज्यों में दशकों पुराने उग्रवाद के खत्म होने की उम्मीद है। शांति समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah), असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और उल्फा के अरबिंद राजखोवा की अगुवाई वाली वार्ता समर्थक गुट के एक दर्जन से अधिक शीर्ष नेता मौजूद थे।

अधिकारियों ने बताया कि राजखोवा के नेतृत्व वाले उल्फा गुट और सरकार के बीच 12 साल तक बिना शर्त हुई वार्ता के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते में असम से जुड़े लंबे समय से लंबित राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर गौर किया गया। इसके अलावा समझौते के तहत मूल निवासियों को सांस्कृतिक सुरक्षा और भूमि अधिकार भी दिया किया जाएगा।

शाह ने बताया महत्वपूर्ण फैसला

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "लंबे समय तक असम और पूरे उत्तर-पूर्व ने हिंसा झेली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ही उग्रवाद, हिंसा और विवाद मुक्त उत्तर-पूर्व भारत की कल्पना लेकर गृह मंत्रालय चलता रहा है... भारत सरकार, असम सरकार और ULFA के बीच जो समझौता हुआ है, इससे असम के सभी हथियारी गुटों की बात को यहीं समाप्त करने में हमें सफलता मिल गई है। ये असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों की शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।" वहीं, असम के मुख्यमंत्री शर्मा ने समझौते को 'ऐतिहासिक' बताया और कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री शाह के मार्गदर्शन और नेतृत्व के कारण संभव हो सका है।

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