भारतीय सेना, NDRF के साथ-साथ स्थानीय इमरजेंसी रिस्पांस डिपार्टमेंट सहित बचाव दल केरल के वायनाड में त्रासदी के बाद रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन में जुटे हैं। पहाड़ी जिले में बड़े पैमाने पर भूस्खलन के तीन दिन बाद ढही इमारतों में फंसे बचे लोगों की तलाश के लिए बड़े ही मुश्किल हालातों में बचाव अभियान चलाया जा रहा है। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज के अनुसार, मंगलवार को वायनाड में हुए भीषण भूस्खलन में कम से कम 308 लोगों की जान चली गई। इसके अलावा केरल के ADGP एम आर अजित कुमार के अनुसार, लगभग 300 लोग अभी भी लापता हैं।
शुक्रवार को बचाव अभियान को चौथा दिन हो गया और इसका दायर भी बढ़ा दिया गया। साथ ही जिंदा बचे लोगों को खोजने के लिए ड्रोन-बेस्ड रडार का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
कई चुनौतियों के कारण रेस्क्यू में रुकावट
कई चुनौतियों के कारण रेस्क्यू में रुकावट भी आ रही हैं। टूटी हुई सड़कें और पुल, खतरनाक इलाके और भारी मशीनों की कमी के कारण काफी मुश्किलें आ रही हैं, जिससे बचाव टीमों के लिए घरों और दूसरी इमारतों पर गिरे कीचड़ और बड़े-बड़े उखड़े पेड़ों को हटाना मुश्किल हो गया है।
इस बीच, भारतीय सेना ने रिकॉर्ड समय में 190 फीट लंबे बेली ब्रिज का निर्माण पूरा कर लिया है। यह पुल इरुवनजिप्पुझा नदी पर मुंडक्कई और चूरलमाला के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों को जोड़ने में मदद करेगा। मंगलवार को हुए विनाशकारी भूस्खलन में दोनों जगहों को जोड़ने वाला पुल बह गया था।
जॉर्ज ने बताया कि वायनाड (Wayanad) में अब तक 199 शवों का पोस्टमार्टम किया जा चुका है। फेसबुक पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि इसके अलावा, शरीर के 130 अंगों के DNA सैंपल भी लिए गए।
रेस्क्यू में जुटी हैं 40 टीम
अधिकारियों ने बताया कि बचावकर्मियों की 40 टीमों ने शुक्रवार को चौथे दिन भूस्खलन प्रभावित वायनाड जिले में तलाशी अभियान शुरू किया। 40 टीमें भूस्खलन प्रभावित इलाकों के छह रीजन में बांट कर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं - अट्टामाला और अरनमाला (पहला), मुंडक्कई (दूसरा), पुंचिरीमट्टम (तीसरा), वेल्लारीमाला गांव (चौथा), जीवीएचएसएस वेल्लारीमाला (पांचवां), और नदी तट (छठा)।
भारतीय सेना ने एक बचाव अभियान में, चार जिंदा व्यक्तियों को भी बचाया। इसमें दो पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं, जो पदवेट्टी कुन्नू, वायनाड में फंसे हुए थे। ऑपरेशन को सटीकता और सावधानी के साथ अंजाम दिया गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन में एक एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) भी लगाया गया है। भारतीय वायु सेना हिंडन एयर बेस से वायनाड के लिए एक C-130 विमान भेज रही है। इस विमान में सब-सॉइल इक्वेशन की निगरानी के लिए एक्सपर्ट की एक टीम के साथ स्पेशल ड्रोन सिस्टम को वायनाड भेजा जा रहा है। ये ड्रोन सिस्टम मिट्टी के नीचे फंसे लोगों की तलाश करेंगे।