नए साल की शुरुआत के साथ ही ठंड भी अपने पूरे चरम पर है। मौसम विभाग की मानें, तो उत्तर भारत के राज्यों में शीतलहर चलती रहेगी। देश के 18 राज्यों में गुरुवार को कोहरे का अलर्ट जारी किया गया। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर निचली इलाकों में शीतलहर के रूप में दिख रहा है। कश्मीर में बुधवार को भी बर्फबारी हुई और आलम ये था कि डोडा में वाटरफॉल ही जम गया। मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश में अगले तीन कड़ाके की ठंड का अलर्ट जारी किया।
साथ ही इस साल जनवरी में UP, MP, राजस्थान, बिहार और गुजरात के कुछ हिस्सों को छोड़कर बचे हुए इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा। वहीं अगर तापमान के लिहाज से देखों, तो लाहौल-स्पीति का ताबो गांव सबसे ठंडा रहा और वहां तापमान -16.7 डिग्री था।
मौसम विभाग के मानें, तो पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश में शीतलहर चलेगी। जबकि तमिलनाडु और पुडुचेरी में बारिश हो सकती है। साथ ही 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा भी चल सकती।
इसके अलावा नॉर्थ ईस्ट राज्यों- असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश में ग्राउंड फ्रॉस्ट कंडीशन रह सकती है।
कहां-कहां छाया रहेगा घना कोहरा?
2 जनवरी को पंजाब, हरियाणा-चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, ओडिशा के अलग-अलग इलाकों में देर रात और सुबह के समय घना कोहरा छाया रहेगा।
इसके अलावा 2 और 3 जनवरी को हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और 2 से 6 जनवरी के दौरान असम और मेघालय और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी घना कोहरा छाए रहने की संभावना है।
2 जनवरी को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ के कुछ हिस्सों में और 2 जनवरी को उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है।
साल 2024 भारत में 1901 के बाद से सबसे गर्म साल रहा, जिसमें औसत न्यूनतम तापमान LPA से 0.90 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के DG मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि 2024 में पूरे भारत में सालाना औसत लैंड सरफेस एयर टेंपरेचर लॉन्ग पीरियड एवरेज (1991-2020) से 0.65 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था।
साल 2024 अब 1901 के बाद से सबसे गर्म साल के रूप में दर्ज किया गया है। इसने 2016 को पीछे छोड़ दिया है, जिसमें औसत लैंड सरफेस एयर टेंपरेचर सामान्य से 0.54 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया था।
यूरोपीय जलवायु एजेंसी ‘कोपरनिकस’ के अनुसार, 2024 शायद अब तक का सबसे गर्म साल होगा और यह ऐसा पहला साल होगा, जब वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा होगा।