चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3), भारत के अंतरिक्ष अभियान के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण मिशन है। इस अभियान की सफलता के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जो चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग में सफल रहे हैं। इससे पहले अमेरिका, चीन और सोवियत संघ (तत्कालीन) ने यह मुकाम हासिल किया था। हालांकि, सॉफ्ट लैंडिंग का लक्ष्य हासिल करना इस बड़े प्लान का सिर्फ एक हिस्सा है। चांद की सतह पर पहुंचने के बाद विक्रम लैंडर (Vikram lander) मॉड्यूल, प्रज्ञान रोवर (Pragyan rover) को नीचे उतार देगा।
'प्रज्ञान' संस्कृत का शब्द है, जिसका मतलब ज्ञान होता है। इस मिशन के तहत, प्रज्ञान छह पहियों वाला रोवर है, जो चंद्रमा की सतह की स्टडी करेगा। यह हर रोज चांद की सतह पर 500 मीटर की दूरी तय करेगा। इसका मुख्य मकसद चांद के भूविज्ञान का अध्ययन करना है, जिससे पृथ्वी के इस उपग्रह की संरचना के बारे में अहम जानकारी मिलेगी। इससे खगोलीय पिंड के इतिहास के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सकती है।
प्रज्ञान, चांद की सतह पर मौजूद अहम तत्वों मसलन मैग्नेशियम, सिलिकॉन, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन आदि के बारे में जांच करेगा। यह खास तौर पर चांद के सूक्ष्म वायुमंडल, दिन/रात के साइकल आदि की स्टडी करेगा। यह रोवर चांद पर पत्थरों के ऊपर मौजूद धूल या मिट्टी के बारे में भी जानकारी हासिल करेगा। रोवर, लेजर का इस्तेमाल कर धूल-मिट्टी की परत को पिघलाकर यह स्टडी करेगा।
प्रज्ञान रोवर स्टीरियोस्कोपिक 3डी कैमरे से लैस है और इससे चांद की सतह की डिजिटल रेंडरिंग हो सकेगी यानी बेहतर डिजिटल इमेज कैप्चर की जा सकेगी। इससे रास्तों का पता लगाने और नेविगेशन में मदद मिलेगी। विक्रम लैंडर, प्रज्ञान की मदद से पृथ्वी पर तमाम सूचनाएं भेजेगा।