विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) ने दिल्ली स्थित एक फर्म को डोमेन नेम www.urbankhadi.com का इस्तेमाल करने के खिलाफ ऑर्डर दिया है, जो अवैध रूप से ब्रांड नेम "खादी" का इस्तेमाल करता है। WIPO दुनिया भर में ब्रांड प्रोटेक्शन के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक विशेष एजेंसी है।
Livemint के मुताबिक, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि WIPO के मध्यस्थता और मध्यस्थता केंद्र के प्रशासनिक पैनल ने फैसला सुनाया है कि फर्म "ओम सॉफ्ट सॉल्यूशंस" ने "गलत ढंग" में डोमेन नाम www.urbankhadi.com को रजिस्टर्ड किया और खादी के नाम पर गलत तरीके से लाभ कमाने के लिए इस्तेमाल किया था।
पैनल का आदेश खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की “ओम सॉफ्ट सॉल्यूशंस” के खिलाफ एक याचिका पर आया, जो ब्रांड नाम “खादी” का गलत इस्तेमाल करके कपड़ों का कारोबार करता था।
पैनल ने केवीआईसी के तर्कों को बल दिया "ये हर्ष गाबा द्वारा गलत लाभ, गलत व्यावसायिक लाभ प्राप्त करने और जनता को ये विश्वास दिलाने के लिए एक व्यवस्थित प्रयास था कि www.urbankhadi.com खादी इंडिया का ही सहयोगी है।"
पैनल ने कहा, "ये साफ है कि विवादित डोमेन नाम में प्रतिवादी का कोई वैध हित नहीं हो सकता है ... कोई भी "खादी" शब्द का इस्तेमाल तब तक नहीं करेगा, जब तक कि वह खादी के साथ जुड़ना नहीं चाहता।"
पैनल ने "ओम सॉफ्ट सॉल्यूशंस" के इन तर्कों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया कि "खादी" शब्द को कोई सुरक्षा छूट नहीं मिली और किसी को भी "खादी" नाम का इस्तेमाल करने का विशेष अधिकार नहीं था।
पैनल ने कहा, "KVIC कई खादी ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन का स्वामी है। शिकायतकर्ता ट्रेडमार्क "खादी" और "खादी इंडिया" का भी मालिक है ...विवादित डोमेन नाम www.urbankhadi.com में KVIC का ट्रेडमार्क शामिल है और ये भ्रामक रूप से शिकायतकर्ता (KVIC) के ट्रेडमार्क जैसा ही है।"
KVIC के अध्यक्ष, विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि WIPO का आदेश न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर भी अपने ब्रांड नेम के उल्लंघन के खिलाफ खादी की लड़ाई को मजबूत करेगा।
उन्होंने कहा,"खादी की पहचान और वैश्विक लोकप्रियता की रक्षा के लिए KVIC सभी उपाय करेगा। KVIC ने ब्रांड नेम के किसी भी दुरुपयोग को रोकने के लिए कई देशों में ट्रेडमार्क "खादी" रजिस्टर्ड किया है, क्योंकि इसका हमारे कारीगरों की आजीविका पर सीधा असर पड़ता है।"
KVIC ने हाल के दिनों में अपने ट्रेडमार्क "खादी" के उल्लंघन के खिलाफ कई मामले जीते हैं और खादी निकाय ने पिछले कुछ सालों में ऐसे उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।