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भारत, कोरिया और जापान में नहीं होगी IPO की कमी, चीन में रह सकता है सूखा

भारत ने जनवरी की शुरुआत से छोटे सौदों की झड़ी लगा दी है। देश में इक्विटी की मांग अधिक रहने के कारण, बाजार में 10 करोड़ डॉलर से अधिक की पेशकश आने की उम्मीद है। चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताओं के बीच हांगकांग में भी बड़े सौदे गायब हो गए। सिंजेंटा ग्रुप ने पिछले हफ्ते शंघाई में 9 अरब डॉलर के IPO के लिए अपना लंबे समय से विलंबित आवेदन वापस ले लिया

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Apr 01, 2024 पर 8:17 AM
भारत, कोरिया और जापान में नहीं होगी IPO की कमी, चीन में रह सकता है सूखा
एशिया में IPO के मामले में मंदी, मुख्य रूप से बीजिंग के घरेलू नए शेयर बिक्री की जांच बढ़ाने के फैसले के कारण थी।

एशिया प्रशांत क्षेत्र में IPO के लिए जनवरी-मार्च 2024 तिमाही 5 वर्षों की सबसे खराब तिमाही रही। अब दक्षिण कोरिया, भारत और जापान से प्राइमरी मार्केट की गतिविधि में तेजी आने की उम्मीद है। वहीं चीन में आईपीओ गतिविधियां रुकी रहने की संभावना है। ब्लूमबर्ग शो के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी और मार्च के बीच पूरे क्षेत्र में नई शेयर बिक्री गिरकर 11 अरब डॉलर हो गई, जो 2019 की शुरुआत के बाद से किसी तिमाही में सबसे कम है। यह राशि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 46% की गिरावट दर्शाती है।

एशिया में IPO के मामले में मंदी, मुख्य रूप से बीजिंग के घरेलू नए शेयर बिक्री की जांच बढ़ाने के फैसले के कारण थी। चीन अपने इक्विटी बाजार में विश्वास बढ़ाने की कोशिश में है। चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताओं के बीच हांगकांग में भी बड़े सौदे गायब हो गए। अक्टूबर 2022 के बाद से हांगकांग में 1 अरब डॉलर से बड़ा आईपीओ नहीं आया है।

सिंजेंटा ग्रुप ने पिछले हफ्ते शंघाई में 9 अरब डॉलर के आईपीओ के लिए अपना लंबे समय से विलंबित आवेदन वापस ले लिया। यह चीन के इक्विटी बाजारों के लिए एक और बड़ा झटका है। इससे पहले अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग लिमिटेड ने अपनी लॉजिस्टिक्स शाखा की लिस्टिंग को रद्द कर दिया था।

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