Bharat Coking Coal IPO: 9 जनवरी को खुलेगा कोल इंडिया की सब्सडियरी का आईपीओ, निवेश से पहले जानें 6 बड़े जोखिम

Bharat Coking Coal IPO: कोल इंडिया की सब्सिडियरी Bharat Coking Coal 9 जनवरी को IPO लॉन्च करने जा रही है। यह 2026 का पहला पब्लिक इश्यू होगा। निवेश से पहले कंपनी से जुड़े 6 बड़े जोखिम समझना जरूरी है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Jan 04, 2026 पर 5:50 PM
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Bharat Coking Coal का IPO इश्यू 9 जनवरी को खुलेगा और 13 जनवरी तक सब्सक्राइब किया जा सकेगा।

Bharat Coking Coal IPO: सरकारी कंपनी Coal India की सब्सिडियरी Bharat Coking Coal 9 जनवरी को अपना IPO लॉन्च करने जा रही है। यह 2026 का पहला पब्लिक इश्यू होगा। रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) के मुताबिक यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसमें Coal India 47.47 करोड़ इक्विटी शेयर बेचेगी।

IPO से जुड़ी अहम तारीखें

यह इश्यू 9 जनवरी को खुलेगा और 13 जनवरी तक सब्सक्राइब किया जा सकेगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 8 जनवरी को रखी गई है। कंपनी 5 जनवरी को IPO का प्राइस बैंड, इश्यू स्ट्रक्चर और लॉट साइज जैसे अहम डिटेल्स जारी कर सकती है।


सरकार का अहम प्लान

Bharat Coking Coal या BCCL की लिस्टिंग सरकार की कोल सेक्टर में बड़ी डिसइन्वेस्टमेंट रणनीति का हिस्सा है। इसका मकसद Coal India की सब्सिडियरीज में छिपी वैल्यू को अनलॉक करना और बाजार में हिस्सेदारी के जरिए पारदर्शिता बढ़ाना है।

2025 में Coal India की एक और यूनिट Central Mine Planning and Design Institute (CMPDIL) ने भी OFS रूट से IPO के लिए ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल किया था।

क्या करती है Bharat Coking Coal

BCCL का मुख्य काम कोकिंग कोल का उत्पादन है, जिसका इस्तेमाल स्टील इंडस्ट्री में होता है। वहीं CMPDIL, Coal India की टेक्निकल और प्लानिंग यूनिट के तौर पर काम करती है।

मजबूत IPO बाजार के बीच आ रहा इश्यू

यह IPO ऐसे समय में आ रहा है, जब भारत का प्राइमरी मार्केट मजबूत दौर से गुजर रहा है। साल 2025 में कंपनियों ने IPO के जरिए करीब 1.76 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे। मजबूत घरेलू लिक्विडिटी और पॉजिटिव निवेशक सेंटिमेंट ने इस तेजी को सपोर्ट किया।

Bharat Coking Coal IPO: किन जोखिमों पर रखें नजर

भारत कोकिंग कोल के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के मुताबिक, निवेश से पहले कुछ अहम ऑपरेशनल और माइनिंग से जुड़े जोखिमों को समझना जरूरी है।

1. कोयले की क्वालिटी: BCCL के कोकिंग कोल में ऐश कंटेंट ज्यादा है, जिससे इसका स्टील इंडस्ट्री में सीधा इस्तेमाल सीमित हो जाता है। इसी वजह से कोयले का बड़ा हिस्सा पावर प्लांट्स की ओर भेजना पड़ता है।

2. कोयला भंडारों की लोकेशन: कई कोयला भंडार काफी गहराई में और झारखंड के घनी आबादी वाले इलाकों में मौजूद हैं। इससे खनन प्रक्रिया जटिल हो जाती है और ऑपरेशनल चुनौतियां बढ़ जाती हैं।

3. झरिया कोलफील्ड्स: इस अहम कोलफील्ड्स के कुछ हिस्सों में खदानों में आग और अपनेआप गर्म होने की समस्या बनी रहती है। इससे कोयला भंडार को नुकसान हो सकता है और प्रोडक्शन पर असर पड़ता है।

4. आधुनिक तकनीक की कमी: आग से प्रभावित इलाकों से सुरक्षित तरीके से कोयला निकालने के लिए उन्नत तकनीक की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

5. रेगुलेटरी सख्ती: सस्टेनेबिलिटी नियम, पर्यावरणीय मंजूरी और अन्य रेगुलेटरी शर्तें अनुपालन लागत बढ़ा सकती हैं या कुछ इलाकों में खनन गतिविधियों को सीमित कर सकती हैं।

6. टैक्स से जुड़े विवाद: DRHP में 1,826.25 करोड़ रुपये के लंबित टैक्स विवादों का भी जिक्र है, जो अब तक सुलझे नहीं हैं और आगे जोखिम बने रह सकते हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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