Bharat Coking Coal IPO: ₹1071 करोड़ के आईपीओ का प्राइस बैंड फिक्स, निवेश से पहले जान लें ये 10 अहम बातें
Bharat Coking Coal IPO: आईपीओ के लिए रिकॉर्डतोड़ वर्ष 2025 के बाद इस साल 2026 का पहला मेनबोर्ड आईपीओ बस कुछ ही दिनों में खुलने ही वाला है। देश की सबसे बड़ी कोल प्रोडक्शन कंपनी कोल इंडिया (Coal India) की सब्सिडरी भारत कोकिंग कोल के आईपीओ का प्राइस बैंड भी फिक्स हो चुका है। आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी और आईपीओ से जुड़ी 10 अहम बातें चेक करें
Bharat Coking Coal IPO: भारत कोकिंग कोल के ₹1,071 करोड़ के आईपीओ में ₹21-₹23 के प्राइस बैंड और 600 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकेंगे। (File Photo- Pexels)
Bharat Coking Coal IPO: इस साल 2026 के पहले मेनबोर्ड आईपीओ का इंतजार अब खत्म होने वाला है। ऐसा इसलिए क्योंकि देश की सबसे बड़ी माइनिंग कंपनी कोल इंडिया (Coal India) की सब्सिडरी भारत कोकिंग कोल (Bharat Coking Coal) का ₹1071 करोड़ का आईपीओ 9 जनवरी को खुलने वाला है और इसका प्राइस बैंड भी फिक्स हो चुका है। इस इश्यू के तहत सिर्फ ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत ही शेयरों की बिक्री होगी और कोई नया शेयर नहीं जारी होगी। यहां इस आईपीओ से जुड़ी 10 अहम बातें बताई जा रही है, जिसे जान लें और फिर आईपीओ में निवेश से जुड़ा फैसला लें।
1. प्राइस बैंड और लॉट साइज
भारत कोकिंग कोल के ₹1,071 करोड़ के आईपीओ में ₹21-₹23 के प्राइस बैंड और 600 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकेंगे। एंप्लॉयीज को हर शेयर पर ₹2 का डिस्काउंट मिलेगा।
2. अहम डेट्स
भारत कोकिंग कोल का आईपीओ 9 जनवरी को खुलेगा और 13 जनवरी को बंद होगा। आईपीओ के तहत शेयरों का अलॉटमेंट 14 जनवरी को फाइनल होगा। फिर बीएसई और एनएसई पर एंट्री के लिए 16 जनवरी का दिन तय किया गया है।
3. किसके लिए कितना हिस्सा आरक्षित?
भारत कोकिंग कोल के आईपीओ का आधा यानी 50% हिस्सा क्वालिफाइंड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित है तो 35% हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स (NII) और 15% हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए। इस इश्यू में ₹107 करोड़ के शेयरों को कोल इंडिया के उन शेयरहोल्डर्स के लिए आरक्षित रखा गया है जिनके पास 1 जनवरी 2026 या इससे पहले से कोल इंडिया के शेयर पोर्टफोलियो में हैं।
4. ग्रे मार्केट में स्थिति यानी GMP
भारत कोकिंग कोल के शेयर ग्रे मार्केट में रॉकेट बने हुए हैं। आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से यह ₹16.25 यानी 70.65% की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर हैं। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल के आधार पर ही निवेश का फैसला लेना चाहिए।
5. आईपीओ में कितने शेयर होंगे जारी
भारत कोकिंग कोल के आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 46.57 करोड़ शेयर जारी होंगे लेकिन ये सभी शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत आएंगे। ये शेयर कंपनी की प्रमोटर कोल इंडिया बेच रही है जो अपनी 10% हिस्सेदारी हल्की कर रही है।
6. रजिस्ट्रार
भारत कोकिंग कोल के आईपीओ का रजिस्ट्रार केफिन टेक है यानी कि शेयरों का अलॉटमेंट फाइनल होने के बाद इसकी साइट पर अलॉटमेंट स्टेटस देख सकेंगे कि कितने शेयर मिले। इसके अलावा बीएसई की साइट पर भी स्टेटस देख सकेंगे।
7. कैसे होगा आईपीओ के पैसों का इस्तेमाल?
चूंकि यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का है तो कंपनी को आईपीओ का पैसा नहीं मिलेगा बल्कि बेचने वाले शेयरहोल्डर कोल इंडिया को मिलेगा।
8. कितनी बड़ी है कंपनी?
वर्ष 1972 में बनी भारत कोकिग कोल पूरी तरह से कोल इंडिया के मालिकाना हक वाली सब्सिडरी है। यह कोकिंग कोल, नॉन-कोकिंग कोल और वाश्ड कोल बनाती है। सितंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक कंपनी के नेटवर्क में 34 ऑपरेशनल माइन्स हैं जिसमें से 4 अंडरग्राउंड, 26 ओपनकास्ट और 4 मिक्स्ड हैं। यह झारखंड के झरिया और पश्चिम बंगाल के रानीगंज में काम करती है। भारत कोकिंग कोल का मुख्य प्रोडक्ट कोकिंग कोल है जिसका इस्तेमाल स्टील और पावर इंडस्ट्रीज में होता है। वित्त वर्ष 2025 में देश में कुल कोकिंग कोल प्रोडक्शन में इसकी 58.50% हिस्सेदारी थी।
9. कैसी है कारोबारी सेहत?
भारत कोकिंग कोल के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2023 में इसे ₹664.78 करोड़ का शुद्ध मुनाफा हुआ था जो अगले वित्त वर्ष 2024 में उछलकर ₹1,564.46 करोड़ लेकिन अगले ही वित्त वर्ष 2025 में यह घटकर ₹1,240.19 करोड़ पर आ गया। इस दौरान कंपनी की टोटल इनकम में भी उठा-पटक दिखी। इसकी टोटल इनकम वित्त वर्ष 2023 में ₹13,018.57 करोड़ और वित्त वर्ष 2024 में ₹14,652.53 करोड़ से वित्त वर्ष 2025 में ₹14,401.63 करोड़ पर आ गई। चालू वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो पहली छमाही अप्रैल-सितंबर 2025 में कंपनी को ₹123.88 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹6,311.51 करोड़ की टोटल इनकम हासिल हो चुकी है। सितंबर 2025 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹1,559.13 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹1,006.52 करोड़ पड़े थे।
10. आईपीओ लाने की क्या है वजह?
कोल इंडिया की योजना अपनी सभी सब्सिडरीज को वित्त वर्ष 2030 तक लिस्ट कराने की है और इसी योजना के तहत भारत कोकिंग कोल का भी आईपीओ आ रहा है।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।