Carraro India IPO: अपने सेगमेंट में कंपनी की पोजिशन अव्वल, लेकिन वैल्यूएशन महंगी

ऑटो-पार्ट्स कंपनी कैरारो इंडिया (Carraro India) ने अपना IPO लॉन्च कर दिया है। कंपनी एग्रीकल्चर और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर के पार्ट्स की अग्रणी कंपनी है। हालांकि, कंपनी का IPO प्राइस थोड़ा महंगा जान पड़ता है। लिहाजा, तुरंत सब्सक्राइब करने को इच्छुक निवेशकों का उत्साह ठंडा पढ़ सकता है। यह कहा जा सकता है कि धीरज रखने वाले निवेशक मजबूत बिजनेस वाले इस IPO को सेकेंडरी मार्केट में ज्यादा आकर्षक वैल्यूएशन पर खरीद सकते हैं

अपडेटेड Dec 20, 2024 पर 5:47 PM
अपर प्राइस बैंड के हिसाब से कंपनी का इश्यू साइज 1,250 करोड़ रुपये है।

ऑटो-पार्ट्स कंपनी कैरारो इंडिया (Carraro India) ने अपना IPO लॉन्च कर दिया है। कंपनी एग्रीकल्चर और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर के ऑटो-पार्ट्स की अग्रणी कंपनी है। हालांकि, कंपनी का IPO प्राइस थोड़ा महंगा जान पड़ता है। लिहाजा, तुरंत सब्सक्राइब करने को इच्छुक निवेशकों का उत्साह ठंडा पढ़ सकता है। यह कहा जा सकता है कि धीरज रखने वाले निवेशक मजबूत बिजनेस वाले इस IPO को सेकेंडरी मार्केट में ज्यादा आकर्षक वैल्यूएशन पर खरीद सकते हैं।

इश्यू के बारे में

अपर प्राइस बैंड के हिसाब से कंपनी का इश्यू साइज 1,250 करोड़ रुपये है। इस लिहाज से मार्केट कैप 4,002 करोड़ रुपये आंका जा सकता है।

कंपनी के बारे में


कैरारो इंडिया एग्रीकल्चर ट्रैक्टर और ट्रांसमिशन कंस्टक्शन व्हीकल के लिए एक्सेल और ट्रांसमिशन सिस्टम बनाती है। इसके प्रमुख OEM (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स) क्लाइंट्स में महिंद्रा, टाटा हिताची, एस्कॉर्ट्स, टैफे, केटरपिलर, सीएनएच आदि शामिल हैं। यह भारत में एग्रीकल्चर ट्रैक्टर और कंस्ट्रक्शन व्हीकल मार्केट में अग्रणी कंपनी है। कैरारो इंडिया घरेलू स्तर पर गियर भी बनाती है, जबकि इसकी समकक्ष कंपनियां मुख्य तौर पर इंपोर्ट पर निर्भर करती हैं। इससे कंपनी की लागत संबंधी क्षमता और ऑपरेशनल बेहतरी में इजाफा होता है।

मार्केट लीडरशिप

नॉन-कैप्टिव एग्रीकल्चरल ट्रैक्टर ट्रांसमिशन मार्केट में कैरारो इंडिया का दबदबा है। इस मार्केट में यह कंपनी एकमात्र प्रमुख सप्लायर है। नॉन-कैप्टिव कंस्टक्शन व्हीकल सेगमेंट ट्रांसमिशन सेगमेंट में कंपनी की हिस्सेदारी 60-65 हिस्सेदारी है।

फाइनेंशियल और वैल्यूएशंस

कंपनी की फाइनेंशियल परफॉर्मेंस थोड़ी सी सुस्त है और इसका बेहतर पोजिशन अब तक शानदार प्रॉफिट में नहीं बदल पाई है। इबिट्डा मार्जिन (EBITDA margins) में हालिया बढ़ोतरी रॉयल्टी पेमेंट में बदलाव पर आधारित है और इसका पूरा असर वित्त वर्ष 2025 के मुनाफे में दिखेगा। इसके अलावा, मार्जिन में बढ़ोतरी बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, लोकलाइजेशन के विस्तार और लागत बचाने वाली अन्य पहल पर निर्भर करेगी।

जहां तक वैल्यूएंशस का सवाल है, तो अपर प्राइस बैंड के हिसाब से IPO का पीई वित्त वर्ष 2027 की अनुमानित अर्निंग का 30.7 गुना है। हमें यह वैल्यूएशन महंगी लग रही है, क्योंकि कंपनी का अपने समकक्षों के मुकाबले सबसे कम इबिट्डा मार्जिन है। कुल मिलाकर, कैरारो इंडिया एक अच्छी कंपनी है और इसकी वैल्यूएशन ज्यादा है। निवेशक सेकेंडरी मार्केट में इस स्टॉक पर नजर रख सकते हैं, जब इस स्टॉक में करेक्शन हो।

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