Concord Biotech IPO: बिग बुल राकेश झुनझुनवाला (Rakesh Jhunjhunwala) की रेयर एंटरप्राइजेज (RARE Enterprises) के निवेश वाली कॉनकॉर्ड बाॉयोटेक (Concord Biotech) का आईपीओ आज खुल गया है। एसबीएफसी फाइनेंस के बाद रेयर एंटरप्राइजेज के निवेश वाली यह एक और कंपनी है जिसका मेनबोर्ड लिस्टिंग के लिए इश्यू खुला है। ग्रे मार्केट की बात करें तो इसके शेयर 185 रुपये यानी 25 फीसदी की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर हैं। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फाइनेंशियल्स और फंडामेंटल्स के आधार पर निवेश से जुड़ा फैसला लेना चाहिए। यहां इश्यू से जुड़ी सभी डिटेल्स दस प्वाइंट्स में दी जा रही हैं
इस बॉयोटेक कंपनी के आईपीओ में 8 अगस्त तक पैसे लगा सकेंगे। 3 अगस्त को यह एंकर निवेशकों के लिए खुला था और आज यह सभी निवेशकों के लिए खुल गया है। एंकर निवेशकों से कंपनी ने 464.95 करोड़ रुपये जुटाए हैं। कंपनी ने 41 एंकर निवेशकों को 741 रुपये के भाव पर 62,74,695 इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं।
इस इश्यू के लिए 705-741 रुपये का प्राइस बैंड फिक्स किया गया है। एंप्लॉयीज को हर शेयर पर 70 रुपये का डिस्काउंट मिलेगा।
इस आईपीओ में पैसे लगाने के लिए 20 शेयरों का लॉट साइज फिक्स किया गया है। खुदरा निवेशक इस इश्यू में कम से कम 14,820 रुपये और अधिकतम 1,92,660 रुपये लगा सकते हैं। वहीं हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स इस इश्यू में न्यूनतम 14 लॉट यानी 2,07,480 रुपये और अधिकतम 67 लॉट यानी 9,92,940 रुपये लगा सकते हैं। इश्यू का 50 फीसदी हिस्सा क्वालिफाईड इंस्टीट्यूशनल बायर्स, 15 फीसदी हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स और 35 फीसदी खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित है।
1,550.59 करोड़ रुपये के इस आईपीओ के तहत कंपनी 2.09 करोड़ से अधिक शेयर जारी करेगी। शेयरों की फेस वैल्यू एक रुपये है। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का है। इस इश्यू के जरिए हेलिक्स इनवेस्टमेंट होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड अपने हिस्से के शेयर बेचेगी। हेल्किस एशिया में हेल्थ कंपनियों में पैसे लगाने वाली प्राइवेट इक्विटी फंड क्वाड्रिया कैपिटल फंड की सब्सिडियरी है। आईपीओ के जरिए हेल्किस अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचेगी। इसने 227.14 रुपये के भाव पर शेयर खरीदे थे। यानी कि इसे हर शेयर 514 रुपये का मुनाफा होने वाला है।
चूंकि यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का है तो कंपनी को कोई पैसा नहीं मिलेगा। इसे हेलिक्स के शेयरों की बिक्री और मार्केट में लिस्टिंग के वास्ते लाया गया है।
Concord Biotech करती क्या है
कंपनी प्रतिरोधी क्षमताओं और कैंसर इत्यादि से जुड़ी बीमारियों के लिए API (एक्टिव फार्मा इनग्रेडिएंट्स) बनाती है। मार्च 2023 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इसके 23 एपीआई प्रोडक्ट्स हैं। इसके प्रोडक्ट्स की बिक्री 70 से अधिक देशों में होती है। वित्त वर्ष 2022 में सेल्स वॉल्यूम के हिसाब से फर्मेंटेशन-बेस्ड एपीआई प्रोडक्ट्स मार्केट में इसकी 20 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है। इसके गुजरात में तीन मैनुफैक्चरिंग प्लांट हैं और दो डीएसआईआर से अप्रूव्ड आरएंडी यूनिट्स हैं।
वित्त वर्ष 2021 में इसे 234.89 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था जो अगले वित्त वर्ष घटकर 174.93 करोड़ रुपये पर आ गया लेकिन फिर अगले ही वित्त वर्ष 2022-23 में यह बढ़कर 240.08 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2021 में 1,182.55 करोड़ रुपये, फिर वित्त वर्ष 2022 में 1,312.80 करोड़ रुपये और फिर वित्त वर्ष 2023 में 1,513.98 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। EBITDA की बात करें तो वित्त वर्ष 2023 में सालाना आधार पर यह 25.6 फीसदी बढ़कर 343.3 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस दौरान इसका RoE वित्त वर्ष 2022 में 16.64 फीसदी से उछलकर वित्त वर्ष 2023 में 26.55 फीसदी पर पहुंच गया।
इस कंपनी में सुधीर वैद और अंकुर वैद समेत प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की 44.08 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं बाकी 55.92 फीसदी हिस्सेदारी पब्लिक के पास है जिसमें हेलिक्स के पास 20 फीसदी, रेयर ट्रस्ट्स (RARE Trusts) के पास 24.09 फीसदी और ओंटारियो के पास 5.39 फीसदी हिस्सेदारी है। सुधीर वैद इसके चेयरमैन और एमडी हैं। अंकुर वैद इसके ज्वाइंट एमडी और सीईओ हैं। ललित सेठी चीफ फाइनेंस ऑफिसर हैं जबकि प्रकाश संजनानी इसके सीएस और कंप्लॉयंस ऑफिसर और असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (फाइनेंस) हैं।
इसमें निवेश को लेकर पहला रिस्क तो ये है कि मैनुफैक्चरिंग या क्वालिटी कंट्रोल को लेकर कोई दिक्कत आती है तो रेगुलेटरी एक्शन हो सकता है जिससे इसके कारोबार पर असर दिख सकता है। मैनुफैक्चरिंग या आरएंडडी ऑपरेशन्स में सुस्ती या बंद होने पर कारोबार को झटका लग सकता है। इसके रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा सीमित ग्राहकों से आता है। एक और बड़ा रिस्क इसके कारोबार को लेकर ये है कि इस पर सरकारी नियमों को खास असर है और समय-समय पर सरकार की प्राइस कंट्रोल की कोशिशों से भी इसके कारोबार पर असर पड़ सकता है। एक्सचेंज रेट में बदलाव और कांट्रैक्ट्स में देरी या फेल होने से जुड़ा रिस्क भी है। इसके अलावा फार्मा इंडस्ट्री में कॉम्पटीशन बहुत अधिक है।
आईपीओ की सफलता के बाद शेयरों का अलॉटमेंट 11 अगस्त को फाइनल होगा। जिन्हें इसके शेयर नहीं मिलते हैं, उनके पैसे वापस 14 अगस्त को मिल जाएंगे और जिन्हें शेयर मिलने हैं, उनके डीमैट खाते में इसे 17 अगस्त को क्रेडिट किया जाएगा। इसके बाद फिर बीएसई और एनएसई पर इसकी 18 अगस्त को एंट्री होगी। इश्यू का रजिस्ट्रार लिंक इनटाइम इंडिया है।