EMS IPO: वाटर और वेस्टवाटर सर्विसेज मुहैया कराने वाली EMS का आईपीओ आज सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। आईपीओ खुलने से पहले छह एंकर निवेशकों से यह 96.37 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। आईपीओ निवेशकों को इसके शेयर 211 रुपये के भाव पर जारी हुए हैं। अब ग्रे मार्केट की बात करें तो इसके शेयर 125 रुपये यानी 59.24 फीसदी की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर मिल रहे हैं। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल्स के आधार पर निवेश का फैसला लेना चाहिए।
आईपीओ की सफलता के बाद इसके शेयरों की बीएसई और एनएसई पर एंट्री होगी। अब एंकर निवेशकों की बात करें तो इसमें एनएवी कैपिटल वीसीसी-एनएवी कैपिटल एमर्जिंग स्टार फंड, एबाकस डाईवर्सिफाईड अल्फा फंड, सेंट कैपिटल फंड, मेरू इनवेस्टमेंट फंड पीसीसी-सेल 1, बोफा सिक्योरिटीज यूरोप, मॉर्गन स्टैनले एशिया (सिंगापुर) ने पैसे लगाए हैं।
321.24 करोड़ रुपये का यह आईपीओ 12 सितंबर तक खुला रहेगा। इसमें 200-211 रुपये के प्राइस बैंड और 70 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकेंगे। इश्यू का आधा हिस्सा क्वालिफाईड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB), 15 फीसदी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) और 35 फीसदी खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित है। आईपीओ की सफलता के बाद शेयरों का अलॉटमेंट 15 सितंबर को फाइनल होगा और फिर 21 सितंबर को मार्केट में एंट्री होगी। इश्यू का रजिस्ट्रार केफिन टेक है।
इस आईपीओ के तहत ₹146.24 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे। इसके अलावा 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 82,94,118 शेयरों की ऑफर फॉर सेल (OFS) विंडो के तहत बिक्री होगी। नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों को पूरा करने में होगा।
इस कंपनी को 2012 में शुरू किया गया था। पहले इसका नाम EMS Infracon था। यह वाटर प्लांट, वेस्टवाटर ट्रीटमेंट, सीवरेज इत्यादि से जुड़ी सर्विसेज मुहैया कराती है। इसका वित्तीय सेहत पिछले तीन वित्त वर्षों से लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2021 में इसे 71.91 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था जो अगले ही वित्त वर्ष 2022 में बढ़कर 78.93 करोड़ रुपये और फिर वित्त वर्ष 2023 में बढ़कर 108.67 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि इसका कर्ज लेवल भी बेतहाशा बढ़ा है। वित्त वर्ष 2021 में 3.16 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2022 में 3.71 करोड़ रुपये के मुकाबले पिछले वित्त वर्ष में टोटल कर्ज बढ़कर 45.40 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।