वाडिया ग्रुप के स्वामित्व वाली एयरलाइन गो फर्स्ट (Go First) ने अपना इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) लाने की योजना को नवंबर तक के लिए टाल दिया है। गो फर्स्ट अपने IPO से 3,600 करोड़ रुपये जुटाने की योजना में थी, लेकिन एविशएन शेयरों को लेकर कमजोर सेंटीमेंट को देखते हुए उसने अपनी यह योजना फिलहाल के लिए टाल दी है।
गो फर्स्ट की योजना से वाकिफ एक सूत्र ने मनीकंट्रोल को बताया, "गो फर्स्ट को अपना IPO लॉन्च करने से पहले ATF कीमतों की नई व्यवस्था का इंतजार करने की सलाह दी गई है। ATF कीमतों की नई व्यवस्था से एविएशन सेक्टर को लेकर सेंटीमेंट मजबूत होने की उम्मीद है।" Go First ने पहले मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अपना IPO लाने की योजना बनाई थी, लेकिन वह इसे लॉन्च करने से पहले कुछ और महीनों का इंतजार करेगी।
एक दूसरे सूत्र ने बताया कि घरेलू और इंटरनेशनल हवाई यात्रा में आई उछाल को देखते हुए गो फर्स्ट अपने IPO को लेकर सकारात्मक है। हालांकि जून तिमाही के अपेक्षाकृत कमजोर होने और जेट फ्यूल (ATF) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने एयरलाइन को अपना प्लान टालने पर मजबूर किया है।
Go First का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) 26 अगस्त को एक्सपायर हो गया और एयरलाइन को अब फिर से अपने IPO के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के पास आवेदन पेपर जमा करने की जरूरत होगी।
SEBI के नियमों के अनुसार, DRHP पर टिप्पणी जारी होने की तारीख के 12 महीनों के भीतर एक पब्लिक इश्यू या राइट्स इश्यू लॉन्च किया चाहिए। महामारी के दौरान इस अवधि को 6 महीने के लिए बढ़ाया गया था, लेकिन अब यह व्यवस्था खत्म हो गई है। ऐसे में गो फर्स्ट को अब दोबारा DRHP दाखिल करना होगा।
पिछले एक साल में यह तीसरी बार है जब गो फर्स्ट ने अपनी IPO योजनाओं में देरी की है। एयरलाइन को पिछले साल अपने IPP के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी से मंजूरी मिली थी। हालांकि सेबी की तरफ से इसके प्रमोटरों (वाडिया परिवार) को एक लंबित पूछताछ के लिए बुलाने जाने के बाद इसने अगस्त 2021 में अपने शेयरों की बिक्री योजना को रोक दिया था। इसके बाद फिर दिसंबर 2021 में ओमीक्रोन वेरिएंट के चलते आई कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए इसने अपनी योजना को आगे बढ़ाया था।
फरवरी में रूस और यूक्रेन के बीत युद्ध शुरू होने के बाद ग्लोबल लेवल पर फैली अनिश्चितता और फिर भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के मेगा आईपीओ की योजना के चलते भी इसके IPO प्लान में देरी हुई। गो फर्स्ट कम से कम 2015 से शेयर बाजार में लिस्टिंग की योजना बना रहा है, जब इसे 'गो एयर' के नाम से जाना जाता था।