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IPO में क्या होता है फिक्स्ड प्राइस और बुक बिल्डिंग, दोनों मेथड एक-दूसरे से कैसे अलग

IPO की बात चलने पर मुख्य रूप से दो तरह के इश्यू सामने आते हैं- फिक्स्ड प्राइस इश्यू और बुक बिल्डिंग इश्यू। ये दोनों मेथड क्या हैं, एक-दूसरे से कैसे अलग हैं, IPO निवेशकों को इस बारे में जानना क्यों जरूरी है, जानिए इस आर्टिकल में...

Ritika Singhअपडेटेड May 30, 2026 पर 4:25 PM
IPO में क्या होता है फिक्स्ड प्राइस और बुक बिल्डिंग, दोनों मेथड एक-दूसरे से कैसे अलग
IPO के जरिए प्राइमरी मार्केट में आम निवेशकों के लिए सिक्योरिटीज या शेयर बेचने के लिए रखे जाते हैं।

जब कोई प्राइवेट कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होने का प्लान करती है तो वह आमतौर पर अपना इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) लेकर आती है। IPO के जरिए प्राइमरी मार्केट में आम निवेशकों के लिए सिक्योरिटीज या शेयर बेचने के लिए रखे जाते हैं। शेयर बाजार में लिस्टिंग से प्राइवेट कंपनी पब्लिक कंपनी बन जाती है। IPO की बात चलने पर मुख्य रूप से दो तरह के इश्यू सामने आते हैं- फिक्स्ड प्राइस इश्यू और बुक बिल्डिंग इश्यू। कुछ IPO दोनों के कॉम्बिनेशन वाले भी हो सकते हैं। लेकिन आखिर यह फिक्स्ड प्राइस मेथड और बुक बिल्डिंग मेथड है क्या? आ​इए जानते हैं...

फिक्स्ड प्राइस इश्यू

BSE की साइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, इस तरह के IPO में वह कीमत जिस पर सिक्योरिटीज या शेयर ऑफर किए जाते हैं और आगे अलॉट किए जाएंगे, वह पहले से ही तय कर दी जाती है। निवेशकों को उसी तय कीमत पर IPO में शेयरों के लिए आवेदन करना होता है।

बुक बिल्डिंग इश्यू

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