IPO lock-in expiry: अगले चार महीनों में कुल 66 कंपनियों का लॉक-इन पीरियड खत्म होने वाला है। इसके चलते अप्रैल से जुलाई के बीच बाजार में 1.47 लाख करोड़ रुपये (17.7 अरब डॉलर) के शेयर ट्रेंडिंग के लिए उपलब्ध हो जाएंगे। इन कंपनियों में टाटा टेक्नोलॉजीज, एक्सिकॉम टेलीसिस्टम्स, होनासा कंज्यूमर (Mamaearth) और जेएसडब्ल्यू इंफ्रा जैसी कंपनियां शामिल हैं। प्लैटिनम इंडस्ट्रीज, एक्सिकॉम टेलीसिस्टम्स, भारत हाईवे इनविट, आर के स्वामी, जेजी केमिकल्स, गोपाल स्नैक्स, पॉपुलर व्हीकल्स एंड सर्विसेज और क्रिस्टल इंटीग्रेटेड सर्विसेज की 1 महीने की लॉक-इन अवधि 1 अप्रैल से 18 अप्रैल के बीच समाप्त होगी।
कब किस कंपनी का लॉक इन पीरियड होगा खत्म?
मुक्का प्रोटीन्स, ज्योति सीएनसी ऑटो, मेडी असिस्ट हेल्थकेयर, ईपैक ड्यूरेबल्स, जना स्मॉल फाइनेंस बैंक और विभोर स्टील ट्यूब्स सहित 22 कंपनियों की 3 महीने की इनवेस्टर लॉक-इन पीरियड 8 अप्रैल से 17 जून के बीच समाप्त हो जाएगी। लॉक-इन पीरियड खत्म होने का मतलब है कि इसके बाद अगर शेयरहोल्डर्स चाहें तो इसका लेनदेन कर सकेंगे।
मामाअर्थ ब्रांड का संचालन करने वाली होनासा कंज्यूमर, IREDA, आईनॉक्स इंडिया, इनोवा कैपटैब, मुथूट माइक्रोफिन, DOMS इंडस्ट्रीज, टाटा टेक्नोलॉजीज, गांधार ऑयल, आस्क ऑटोमोटिव, मनोज वैभव जेम्स, जेएसडब्ल्यू इंफ्रा और मेडी असिस्ट हेल्थकेयर सहित 38 कंपनियों में 5 और 6 महीने का लॉक-इन है, जो 1 अप्रैल से 29 जुलाई के बीच समाप्त हो जाएगी।
ग्लोबल सर्फेस की एक साल की शेयर लॉक-इन पीरियड 1 अप्रैल को समाप्त हो गई, जबकि IKIO लाइटिंग की अवधि 17 जून को समाप्त होगी। बीकाजी फूड्स, लैंडमार्क कार्स, आईनॉक्स ग्रीन और केफिन टेक्नोलॉजीज सहित 15 कंपनियों के लिए 1.5 साल की लॉक-इन अवधि 15 अप्रैल से 2 जुलाई के बीच खुलेगी। ग्लोबल सर्फेस, साई सिल्क्स (कलामंदिर), जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर, प्लैटिनम इंडस्ट्रीज और एक्सिकॉम टेलीसिस्टम्स की लॉक-इन अवधि आज खुल गई। सोमवार को ये सभी पांच कंपनियों के शेयर हरे निशान पर बंद हुए हैं।
क्या होता है लॉक-इन पीरियड
लॉक-इन पीरियड या लॉक-अप पीरियड उस समय को कहते है जिस दौरान अपने निवेश को नहीं बेचा जा सकता है। सेबी ने निवेशकों के कई ग्रुप्स के लिए अलग-अलग शेयर लॉक-इन तय किए हैं। एंकर निवेशकों के पास आम तौर पर लॉक-इन अवधि होती है, जहां उनके 50 फीसदी शेयर एक महीने के लिए लॉक होते हैं और शेष 50 फीसदी आवंटन की तारीख से तीन महीने के लिए लॉक होते हैं। प्रमोटर्स के लिए 20 फीसदी तक के अलॉटमेंट के लिए लॉक-इन पीरियड 18 महीने और 20 प्रतिशत से अधिक के अलॉटमेंट के लिए 6 महीने है।