मध्यपूर्व में लड़ाई की वजह से शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई है। मार्च में बाजार के प्रमुख सूचकांक अब तक करीब 10 फीसदी गिर चुके है। ऐसे में कई कंपनियों ने आईपीओ के प्लान को टाल दिया है। लेकिन, क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो और फिनटेक कंपनी फोनपे विदेशी संस्थागत निवेशकों से बातचीत शुरू कर दी हैं। दोनों कंपनियां अपने आईपीओ के लिए इनवेस्टर्स की डिमांड का अंदाजा लगाना चाहती हैं।
मई या जून में आ सकते हैं आईपीओ
Zepto और PhonePe ने सिंगापुर, हांगकांग, यूनाइटेड किंग्डम और यूएसए जैसे दुनिया के बड़े फाइनेंशियल हब में विदेशी संस्थागत निवेशकों से बातचीत की है। सूत्रों ने बताया कि यह बातचीत आने वाले दिनों में भी जारी रहने वाली है। सूत्रों ने बताया कि दोनों कंपनियां मई या जून में अपने आईपीओ लॉन्च कर सकती हैं। हालांकि, आईपीओ के समय के बारे में अंतिम फैसला पश्चिम एशिया में लड़ाई की स्थिति पर निर्भर करेगा।
जेप्टो की ग्रोथ दूसरी क्विक कॉमर्स कंपनियों से तेज
एक सूत्र ने बताया कि जेप्टो जून में आईपीओ पेश करना चाहती है। उन्होंने कहा, "कंपनी आईपीओ के प्लान पर तेजी से आगे बढ़ रही है। यह जून में आईपीओ पेश करना चाहती है। कंपनी को निवेशकों का बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।" जेप्टो की ग्रोथ दूसरी क्विक कॉमर्स कंपनियों के मुकाबले तेज रही है। इसका मार्केट शेयर भी तेजी से बढ़ा है। इस मामले में यह प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से आगे है।
आईपीओ पर मध्यपूर्व की लड़ाई का ज्यादा असर नहीं
दूसरे सूत्र ने बताया कि भारतीय कंपनियों के आईपीओ में निवेश के मामले में गल्फ के इनवेस्टर्स की हिस्सेदारी कम रही है। इसलिए जेप्टो और फोनपे जैसी बड़ी भारतीय कंपनियों के आईपीओ पर मध्यपूर्व में लड़ाई का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। सूत्र ने बताया कि एक या दो सॉवरेन वेल्थ फंड को छोड़ दिया जाए तो भारतीय कंपनियों के आईपीओ में गल्फ के इनवेस्टर्स की ज्यादा दिलचस्पी नहीं रही है।
फोनपे के आईपीओ को सेबी की मंजूरी
फोनपे और जेप्टो में से दोनों के आईपीओ 10,000-10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के हो सकते हैं। हालांकि, आईपीओ का फाइनल आकार और लॉन्च होने का समय बाजार की स्थितियों पर पड़ेगा। फोनपे के आईपीओ को सेबी का एप्रूवल मिल गया है। जेप्टो के आईपीओ को अभी सेबी का एप्रूवल नहीं मिला है। इस बारे में भेजे गए ईमेल का जवाब जेप्टो और फोनपे ने नहीं दिए।
मध्यपूर्व में लड़ाई से शेयर बाजार में गिरावट
शेयर बाजार में मध्यपूर्व की लड़ाई शुरू होने के बाद से तेज गिरावट आई है। मार्च में बाजार के प्रमुख सूचकांक 10 फीसदी से ज्यादा गिर चुके हैं। 13 मार्च को निफ्टी 488 अंक गिरकर 23,151 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.93 फीसदी यानी 1,470.50 अंक गिरकर 74,563 पर बंद हुआ।