JG Chemicals का IPO अच्छा या बुरा? क्या आपको लगाना चाहिए इसमें पैसे? पढ़ें ये स्पेशल रिव्यू

JG Chemicals IPO: जेजी केमिकल्स, जिंक ऑक्साइड बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी है और घरेलू बाजार में इसकी 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है। अपने मौजूदा कारोबारी रूप में यह कंपनी, टायर इंडस्ट्री के ग्रोथ की एक प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रही है। कंपनी अपने IPO में नए शेयरों की बिक्री के जरिए 165 करोड़ रुपये जुटाएगी

अपडेटेड Mar 05, 2024 पर 4:09 PM
JG Chemicals का IPO 5 मार्च से 7 मार्च तक बोली के लिए खुला है

JG Chemicals IPO: जेजी केमिकल्स, जिंक ऑक्साइड बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी है और घरेलू बाजार में इसकी 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है। अपने मौजूदा कारोबारी रूप में यह कंपनी, टायर इंडस्ट्री के ग्रोथ की एक प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रही है। इसके अलावा कंपनी सिरेमिक, फार्मा और एग्रोकेमिकल्स बिजनेस में विस्तार के साथ कारोबार में विविधता ला रही है। कंपनी अपने IPO में नए शेयरों की बिक्री के जरिए 165 करोड़ रुपये जुटाएगी। इसमें से 25 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज घटाने और 95 करोड़ रुपये का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा।

IPO से जुड़े डिटेल्स को आप नीचे देख सकते हैं-

IPO


बिजनेस मॉडल

कंपनी ने अपना कारोबार 1975 में शुरू किया था। कंपनी के पास पश्चिम बंगाल (जंगलपुर और बेलूर) में दो और आंध्र प्रदेश (नायडुपेटा) में एक प्लांट्स हैं। इसकी कुल क्षमता 77,040 टन है। इसमें जिंक ऑक्साइड के लिए लगभग 60,000 टन, जिंक सल्फेट के लिए 10,000 टन, और जिंक सिल्लियों के लिए करीब 7,000 टन क्षमता है।

जिंक ऑक्साइड एक इनऑर्गेनिक कंपाउंड है, जिसका इस्तेमाल रबर (लचीलापन, मौसम प्रतिरोधक), सिरेमिक (तापमान में स्थिरता), बैटरी (फ्यूल एलीमेंट्स), और कृषि (पौधों के संरक्षण से जुड़े उत्पादों) जैसे विभिन्न सेगमेंट में किया जाता है। JG केमिकल्स मुख्य रूप से रबर और टायर इंडस्ट्री को सप्लाई करती है और अपना 90 प्रतिशत रेवेन्यू कंपनी इन्हीं बाजार से हासिल करती है। वहीं करीब 7 प्रतिशत बिक्री फार्मा और सिरेमिक बाजारों से होती है।

कंपनी मुख्य रूप से बड़ी स्टील मिलों और गैल्वनाइजर्स से जिंक ड्रॉस (जिंक स्कार्प/कच्चा माल) खरीदती है और इसे ग्लोबल स्तरर पर पसंदीदा "फ्रेंच" प्रक्रिया के जरिए जिंक ऑक्साइड के विभिन्न ग्रेड में परिवर्तित करती है। इस्तेमाल किए जाने वाले कच्चे माल का करीब दो-तिहाई आयात होता है, जिसके लिए कंपनी के पास एक मजबूत सप्लाई नेटवर्क है। हालांकि, इनपुट सोर्सिंग के लिए लीड टाइम को देखते हुए, कंपनी 45 दिनों के लिए एक इनवेंट्री बनाए रखती है।

कच्चे माल और अंतिम उत्पाद दोनों की कीमत लंदन मेटल एक्सचेंज पर जिंक की कीमत के साथ बेंचमार्क की जाती है।

कारोबारी प्रदर्शन

वित्त वर्ष 2017 से 2023 तक, कंपनी की टॉप लाइन 21 प्रतिशत CAGR दर से बढ़ी। वहीं वॉल्यूम 14 प्रतिशत CAGR के दर से बढ़ा। EBITDA मार्जिन औसतन 10 फीसदी के करीब रहा है। वित्त वर्ष 2020 (जब कोरोना महामारी से कंपनी का कारोबार प्रभावित हुआ था) को छोड़कर इसका रिटर्न रेशियो 22 प्रतिशत से अधिक रहा है। वित्त वर्ष 2020 में कोरोना महामारी से कंपनी का कारोबार प्रभावित हुआ था।

हालांकि, वित्त वर्ष 24 में जिंक की कीमतों में भारी गिरावट का कंपनी पर असर पड़ा, जिससे उत्पाद की कीमतों में गिरावट आई। कच्चे माल की इनवेंट्री की अधिक लागत का मार्जिन पर असर पड़ा, जिसके कारण वित्त वर्ष 2024 की पहली छमाही में EBITDA मार्जिन 5 प्रतिशत से कम था। वित्त वर्ष 2024 की दिसंबर तिमाही में, कंपनी अपने औसत ऐतिहासिक मार्जिन को पाने में सक्षम रही।

आगे का बिजनस प्लान

जिंक ऑक्साइड का बाजार काफी हंटा हुआ और असंगठित है। यह JG केमिकल्स जैसी बड़ी कंपनियों के लिए बाजार हिस्सेदारी हासिल करने का एक मौका मुहैया कराता है। कुछ छोटे प्रतिद्वंदी कंपनियों के उलट, कंपनी बेहतर सप्लाई-चेन मैनजमेंट और पार्टनर्स के साथ लंबी अवधि के संबंधों के जरिए जिंक ऑक्साइड की विश्वसनीय सप्लाई को बनाए रखने में सक्षम रही है।

मार्जिन के मामले में बात करें, कंपनी ने फार्मा और एग्री केमिकल्स जैसे कुछ नए बाजार में कदम रखा है, जहां मार्जिन अधिक है। हालांकि, इन इंडस्ट्री में रेगुलेटर्स का काफी हस्तक्षेप रहता है। ऐसे में इसके बढ़ने में कुछ समय लग सकता है।

कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो, 0.11x है, जो बताता है कि कंपनी के पास अधिक निवेश की गुंजाइश है। लेकिन दूसरी तरफ यह अधिक वर्किंग कैपिटल की जरूरत वाला बिजनेस है, जिसका ग्रॉस मार्जिन करीब 19 प्रतिशत के साथ अपेक्षाकृत कम है। इसके एंड मार्केट में मांग स्थिर रहता है, लेकिन कीमतों को एक साइकल से गुजरना पड़ता है। कुल मिलाकर, इसके बिजनेस की प्रकृति कमोडिटी जैसी है। इसके अलावा FY23 के लिए 12x EV/EBITDA का वैल्यूएशन मूल्यांकन भी आकर्षक नहीं है। इसलिए, रिटेल निवेशक को थोड़ा इंतजार करना चाहिए और इसके नए बिजनेसों के ग्रोथ पर नजर रखना चाहिए।

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