दिग्गज फंड मैनेजर प्रशांत जैन ने जियो प्लेटफॉर्म्स के बारे में बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि इसक कंपनी का बिजनेस न सिर्फ भारत बल्कि ग्लोबल एसेट-लाइट टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बन सकता है। जैन का मानना है कि जियो प्लेटफॉर्म्स ने जिस टेक्नोलॉजी स्टैक को विकसित किया है और जिसका इस्तेमाल वह भारत में कर रही है उसे पूरी दुनिया को ऑफर कर सकती है।
जियो दुनियाभर में अपनी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकती है
जैन के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स के पास पार्टनरशिप के जरिए दुनियाभर में अपनी टेक्नोलॉजी का फायदा उठाने का मौका है। विदेश में नेटवर्क बनाए बगैर कंपनी के लिए यह ग्रोथ का नया अवसर है। जियो प्लेटफॉर्म्स की शुरुआत 10 साल पहले हुई थी। अब कंपनी खुद को स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट कराने जा रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्तूबर को खुल गया है।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपना टेक्नोलॉजी स्टैक खुद ही तैयार किया है
जैन ने कहा, "जियो ऐसा डिजिटल नेटवर्क बनाया है, जो दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल नेटवर्क्स में से एक है। चीन के बाहर मोबाइल डेटा ट्रैफिक के मामले में जियो प्लेटफॉर्म्स नंबर वन है। खास बात यह है कि इसने अपना टेक्नोलॉजी स्टैक तैयार किया है। इसे स्ट्रॉन्ग पेटेंट पोर्टफोलियो का सपोर्ट है। इस वजह से इसकी क्षमता ट्रेडिशनल टेलीकॉम ऑपरेटर्स से काफी ज्यादा है।"
कंपनी अपने टेक्नोलॉजी स्टैक को दूसरे देशों को एक्सपोर्ट कर सकती है
उन्होंने कहा, "जियो पार्टनरशिप के जरिए अपने टेक्नोलॉजी स्टैक को एक्सपोर्ट कर सकती है। इसके लिए कंपनी को विदेश में नेटवर्क बनाने के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर इस काम को ठीक तरह से किया जाता है तो जियो का टेलीकॉम बिजनेस आगे एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म बन सकता है।"
फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस के लिए अपनी अनलाइसेंस्ड-बैंड रेडियो टेक्नोलॉजी
जियो को जो चीज दूसरी टेलीकॉम कंपनियों से अलग करती है वह इसकी इन-हाउस टेक्नोलॉजी है। कंपनी ने खुद का ऑपरेशंस सपोर्ट सिस्टम्स (OSS) और बिजनेस सपोर्ट सिस्टम्स (BSS) बनाया है। कंपनी ने फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस के लिए प्रॉपरायटरी अनलाइसेंस्ड-बैंड रेडियो टेक्नोलॉजी विकसित की है। इससे कंपनी फाइबर लाइन के बगैर घरों में ब्रॉडबैंड सर्विस ऑफर करती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मामले में भी आगे है जियो प्लेटफॉर्म्स
जियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मामले में भी आगे है। इसका जियोब्रेन प्लेटफॉर्म AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल नेटवर्क ऑपरेशंस में करता है। जियो ने पिछले सालों में जो क्षमता विकसित की है और जितना निवेश किया है, उससे कमाई का एक अतिरिक्त स्रोत बना है। कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने, अलग-अलग मार्केट के हिसाब से अपनी टेक्नोलॉजी में बदलाव करने और पहले से स्थापित ग्लोबल वेंडर्स का मुकाबला करना होगा।
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