LIC IPO : भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance Corporation of India) यानी एलआईसी का IPO को सिर्फ डिसइनवेस्टमेंट (divestment) का लक्ष्य हासिल करने की कवायद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि सरकार इसके जरिए एक बड़े रिफॉर्म की ओर भी कदम बढ़ा रही है। लाइवमिंट ने एक शीर्ष सरकारी अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है।
अधिकारी ने कहा, “इस धारणा को बदले जाने की जरूरत है कि हम सिर्फ डिसइनवेस्टमेंट लक्ष्य हासिल करने के लिए IPO ला रहे हैं।” उन्होंने कहा, शुरुआत से ही इसका उद्देश्य रिफॉर्म्स को लागू करना है। वित्त मंत्री ने भी इसी बात पर जोर दिया है।
भविष्य के डिसइनवेस्टमेंट को मिलेगी दिशा
अधिकारी ने संकेत दिए कि भारत के सबसे बड़े इस IPO से मिलने वाली धनराशि से भविष्य में सरकार की एसेट्स के डिसइनवेस्टमेंट या IPO लाने का एक तरीका तय हो सकता है, जिससे अच्छी वैल्यू हासिल की जा सके।
सरकार गैर रणनीतिक क्षेत्रों से पूरी तरह बाहर होना चाहती है। वहीं एटॉमिक एनर्जी, स्पेस और डिफेंस, ट्रांसपोर्ट और टेलिकम्युनिकेशन, पावर, पेट्रोलियम, कोयला और अन्य खनिजों और बैंकिंग, बीमा और फाइनेंशियल सर्विसेज के चिह्नित रणनीतिक क्षेत्रों में न्यूनतम उपस्थिति रखना चाहती है। एलआईसी का IPO सरकार की इसी व्यापक नीति के अनुरूप है।
सरकार का दृढ़ संकल्प भी होगा स्पष्ट
इकोनॉमिस्ट्स ने कहा, LIC IPO से बाजार को मजबूत संकेत मिलते हैं कि सरकार का मतलब बिजनेस है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा, “Disinvestment और एसेट की बिक्री दो बड़े रिफॉर्म हैं, जिन्हें सरकार मुश्किल दौर में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। भावी Disinvestment का तरीका तय होने के साथ ही, इससे ऐसे समय में सरकार के दृढ़ संकल्प का पता चलेगा और सेंटीमेंट को मजबूती मिलेगी जब बाजार को आशंका है कि सरकार अनिश्चित हालात के कारण पीछे हट रही है।”
एलआईसी की 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी सरकार
रविवार को ही सीएनबीसी टीवी18 ने खबर दी थी कि सरकार ने एलआईसी के IPO के लिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के पास संशोधित ड्राफ्ट पेपर (DRHP) जमा कर दिया है। साथ ही बताया था कि मार्केट रेगुलेटर सोमवार यानी 25 अप्रैल को प्रेलिमिनेरी डॉक्यूमेंट को मंजूरी दे सकता है। उधर, न्यूज एजेंसी पीटीआई ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने IPO के आकार को 5 फीसदी से घटाकर 3.5 फीसदी कर दिया है।
वहीं, अब 6 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन के साथ शेयर सेल से सरकार का 21,000-30,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है। रिजर्वेशन, डिस्काउंट और इश्यू प्राइस पर बुधवार तक फैसला हो जाएगा।