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LIC IPO में इनवेस्ट करने से पहले इसके रिस्क के बारे में जान लें, फायदे में रहेंगे

एलआईसी के मामले में न्यू बिजनेस प्रीमियम में पार्टिसिपेटिंग प्रोडक्ट्स की ज्यादा हिस्सेदारी है। इसका असर शेयरहोल्डर्स के मार्जिन पर पड़ सकता है। कंपनी ने इनवेस्टर्स की इस चिंता को दूर करने के लिए कहा है कि वह फ्यूचर में नॉन-पार्टिसिपेटिंग प्लान पर फोकस करेगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 28, 2022 पर 6:02 PM
LIC IPO में इनवेस्ट करने से पहले इसके रिस्क के बारे में जान लें, फायदे में रहेंगे
आईपीओ के लिए एलआईसी की वैल्यूएशन 6 लाख करोड़ रुपये निकाली गई है। इस आधार पर इसकी इम्बेडेड वैल्यू 1.1 गुना आती है। यह एचडीएफसी लाइफ, आईसीआईसीआई प्रू और एसबीआई लाइफ के मुकाबले कम है।

LIC के आईपीओ का इंतजार खत्म होने जा रहा है। यह 4 मई को खुल जाएगा। यह देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी का आईपीओ है। इसलिए इसकी खूब चर्चा हो रही है। उधर, एलआईसी पॉलिसीहोल्डर्स, रिटेल इनवेस्टर्स और एंप्लॉयीज को डिस्काउंट दे रही है। इस वजह से भी इसमें लोगों की दिलचस्पी दिख रही है। लेकिन, आईपीओ छोटा हो या बड़ा, उससे कुछ रिस्क जुड़ा होता है। आइए जानते हैं इस इश्यू से क्या रिस्क जुड़ा है।

सबसे पहले हमें इम्बेडेड वैल्यू पर गौर करना होगा। लाइफ इश्योरेंस कंपनियों की सही वैल्यूएशन का पता लगाने का यह एक अच्छा पैमाना है। इम्बेडेड वैल्यू का मतलब मौजूदा बिजनेस से फ्यूचर में होने वाले प्रॉफिट और कंपनी का नेटवर्थ है। प्राइवेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी एचडीएफसी लाइफ के शेयरों में उसके इम्बेडेड वैल्यू के 4 गुना पर कारोबार हो रहा है। एसबीआई लाइफ और आईसीआईसीआई प्रू लाइफ के शेयरों में भी उनके इम्बेडेड वैल्यू के 3 से 2.5 गुना पर कारोबार हो रहा है।

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आईपीओ के लिए एलआईसी की वैल्यूएशन 6 लाख करोड़ रुपये निकाली गई है। इस आधार पर इसकी इम्बेडेड वैल्यू 1.1 गुना आती है। यह एचडीएफसी लाइफ, आईसीआईसीआई प्रू और एसबीआई लाइफ के मुकाबले कम है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एलआईसी का इम्बेडेड वैल्यू ग्लोबल इंश्योरेंस कंपनियों के मुकाबले भी कम है।

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