LIC IPO: देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी (Life Insurance Corporation) के इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) का साइज 40 फीसदी तक घटाया जा सकता है। इस मामले से वाकिफ सूत्रों ने बताया कि सरकार पहले LIC के आईपीओ से 60,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी कर रही थी। हालांकि अब वह इसकी सिर्फ 21,000 करोड़ रुपये का IPO लॉन्च करने की तैयारी में है। इसके अलावा इसके साथ 9,000 करोड़ रुपये का ग्रीनशू ऑप्शन (Greenshoe Option) भी लॉन्च किया जाएगा, जिससे आईपीओ का कुल साइज 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह भी जानकारी मिली है कि एलआईसी के आईपीओ को 2 मई 2022 को लॉन्च किया जा सकता है।
क्या होता है ग्रीन शू ऑप्शन?
ग्रीन शू ऑप्शन, शेयरों के अतिरिक्त अलॉटमेंट का एक विकल्प है। अगर कंपनी के आईपीओ उसके साइज से अधिक सब्सक्रिप्शन मिलता है तो वह ग्रीन शू ऑप्शन के जरिए अतिरिक्त शेयरों को अलॉट कर सकती है। इससे कंपनी को बाजार की मांग और स्थिति के अनुसार अपने आईपीओ साइज में बदलाव करने की इजाजत मिलती है। उदाहरण के लिए एलआईसी का प्रस्तावित ऑफर साइज अगर 21,000 करोड़ तय होता है और उसे निवेशकों से 28,000 करोड़ रुपये की बोली मिलती है, तो वह ग्रीन शू विकल्प के तहत 7,000 करोड़ अतिरिक्त शेयरों को अलॉट कर सब्सक्रिप्शन को रिटेन कर सकती है। बता दें कि एलआईसी 9,000 करोड़ रुपये का ग्रीन शू ऑप्शन रखने की तैयारी कर रही है।
अंग्रेजी अखबार बिजनेस स्टैंडर्ड ने LIC के सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि एलआईसी के IPO को 2 मई को लॉन्च किया जा सकता है। सरकार ने LIC के IPO के लिए फरवरी में ड्राफ्ट पेपर जमा किया था। सरकार के पास एलआईसी का आईपीओ लाने के लिए 12 मई तक का समय है। अगर इस तारीख तक वह आईपीओ नहीं ला पाती है, तो उसे SEBI के पास फिर से आईपीओ की मंजूरी के लिए कागजात जमा करने होंगे। साथ ही उसे एलआईसी के दिसंबर तिमाही के नतीजे और कंपनी की नई एम्बेडेडे वैल्यू (Embedded Value) भी अपडेट करने होंगे। ड्राफ्ट पेपर के मुताबिक, एलआईसी की एम्बेडेड वैल्यू अभी 5.39 लाख करोड़ रुपये बताई गई है।
LIC का वैल्यूएशन भी घटाया
रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने LIC का वैल्लूएशन भी घटाकर 6 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। यह उसके एम्बेडेड वैल्यू (5.39 लाख करोड़ रुपये) का महज 1.1 गुना है। सरकार ने फरवरी में आईपीओ के लिए जो ड्राफ्ट पेपर जमा किए थे, उसमें एलआईसी का वैल्यूएशन करीब 12 लाख करोड़ रुपये लगाया गया था। हालांकि अब सरकार 6 लाख करोड रुपये के वैल्यूएशन पर करीब 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 30,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की तैयारी कर रही है। एक इनवेस्टमेंट बैंकर ने बताया, "LIC के वैल्यूएशन में खासी कमी इसके आईपीओ की सफलता को सुगम बनाएगी। सरकार चाहती है IPO में निवेश करने वाले निवेशकों को लिस्टिंग पर लाभ मिले और वे लिस्टिंग के बाद भी इसके शेयरों को खरीदने में दिलचस्पी रखें।"
क्यों घटाया जा रहा IPO का साइज?
रुस और यूक्रेन के बीच जंग में रोज बदलते हालात से शेयर बाजार में अभी अस्थिरता देखी जा रही है। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक की तरफ से ब्याज दरों को बढ़ाने, मॉनिटरी पॉलिसी को कड़ा करने और विदेशी निवेशकों की तरफ से बिकवाली से भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। कई एक्सपर्ट्स का कहना था कि बाजार में मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए सरकार को 60,000 करोड़ रुपये जुटाने में दिक्कत हो सकती है।
अभी भी होगा देश का सबसे बड़ा आईपीओ
सरकार एलआईसी के आईपीओ साइज को घटाकर अगर 21,000 करोड़ रुपये करती है, तो भी यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। अभी तक देश का सबसे बड़ा आईपीओ लाने का रिकॉर्ड पेटीएम के नाम है, जिसने पिछले साल 18,300 करोड़ रुपये का आईपीओ लाया था।